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सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को बड़ा झटका, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने का फै

नई दिल्ली। केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टाबलिशमेंट एक्ट के तहत उच्चाधिकार कमेटी एक हफ्ते में उनके मामले पर फैसला करे। उच्चाधिकार कमेटी के अंतिम फैसला आने तक आलोक वर्मा कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे।

आज फैसला सुनाने के दिन चीफ जस्टिस छुट्टी पर थे जिसकी वजह से ये फैसला कोर्ट नंबर 1 की बजाय कोर्ट नंबर 12 में जस्टिस संजय किशन कौल ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 6 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टाबलिशमेंट एक्ट के तहत उच्चाधिकार कमेटी में प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस शामिल हैं। इस कमेटी को एक हफ्ते के अंदर आलोक वर्मा पर फैसला करना है। लेकिन तब तक कोई नीतिगत फैसला आलोक वर्मा नहीं ले सकते हैं। वर्मा 31 जनवरी को रिटायर होनेवाले हैं। ऐसे में अगर उच्चाधिकार कमेटी कोई फैसला भी लेती है तो वर्मा के लिए दो हफ्ते का ही समय मिलेगा किसी भी मामले पर फैसला करने के लिए।

मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि दो आला अधिकारियों का झगड़ा रातों रात सामने नहीं आया। ऐसा जुलाई से चल रहा था। उन्हें आधिकारिक काम से हटाने से पहले चयन समिति से बात करने में क्या दिक्कत थी? 23 अक्टूबर को अचानक फैसला क्यों लिया गया ?

जस्टिस संजय किशन कौल ने सीवीसी के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि अगर हम ये मान लें कि उस समय की परिस्थितियों के अनुसार सरकार की कार्रवाई जरूरी थी तो आपने चयन समिति से संपर्क क्यों नहीं किया? तब तुषार मेहता ने कहा था कि कानूनन इसकी जरूरत ही नहीं थी। तुषार मेहता ने कहा था कि अपनी जांच और उस समय के हालात के चलते हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि एक अति गंभीर स्थिति आ गयी है| ऐसे में आलोक वर्मा को और अधिक काम करने नहीं दिया जा सकता। इसलिए हमने उन्हें छुट्टी पर भेजना ही उचित समझा।

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