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मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर जगदलपुर में ध्वजारोहण के बाद प्रदेशवासियों को किया संबोधित रायपुर, 26 जनवरी (हि.स.) । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में ध्वजारोहण किया । इसके बाद वे प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की एकता, अखण्डता के साथ प्रदेश में संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। समाज के किसी भी वर्ग पर यदि कहीं से कोई भी संकट आता है तो हमारी सरकार उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी मिलेगी। किसानों, ग्रामीणों तथा आम जनता का सबसे बड़ा संरक्षक हमारा संविधान है, लेकिन अगर कोई नया कानून इस व्यवस्था में आड़े आता है तो ऐसी चुनौती से निपटना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे हमने छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक के माध्यम से निभाया। मैं आज फिर एक बार कहना चाहता हूं कि संविधान ने जो संरक्षण आपको दिया है, उसके रास्ते में आने वाली बाधाओं के निदान के लिए हम हमेशा तत्पर रहेंगे, चाहे इसके लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष करना पड़े। मुख्यमंत्री ने अमर शहीदों, संविधान निर्माताओं और देश के नेताओं को याद किया मुख्यमंत्री ने महान राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि सबसे पहले मैं परलकोट विद्रोह के नायक अमर शहीद गैंदसिंह और उनके साथियों को नमन करता हूं, जिन्होंने सन् 1857 की पहली व्यापक क्रांति के पहले ही छत्तीसगढ़ में आजादी की अलख जगाई थी। उसकी ज्वाला को वीर गुण्डाधूर और शहीद वीरनारायण सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने आगे बढ़ाया और फिर पूरा छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गया। आजादी की लड़ाई को जुनून में बदलने वाले अनेक अमर शहीदों के साथ इसे निर्णायक मुकाम पर पहुंचाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, उस दौर के सभी नायकों और भारतमाता के गुमनाम सिपाहियों को मैं सादर नमन करता हूं। आजाद देश को अपना भाग्य विधाता बनाने का अवसर हमारे महान संविधान ने दिया, जिसे बनाने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और प्रारूप समिति के सभापति बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। उनके साथ ही देश के विभिन्न क्षेत्रों के विचारकों और कानूनविदों ने संविधान सभा तथा विभिन्न समितियों के सदस्य के रूप में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, इनमें हमारे छत्तीसगढ़ के कानूनविद भी शामिल थे, आज मैं उन सबको नमन करता हूं। हमारे संविधान की सबसे बड़ी बात यह है कि इसे हम भारत के लोगों ने स्वयं बनाया और स्वयं को आत्मार्पित किया है। सद्भाव और समरसता के रास्ते पर अडिग रहा है छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यह अवसर है कि हम अपने संविधान निर्माताओं की चिंता को साझा करें, आपस में विचार-विमर्श करें। संविधान के आधार पर देश चले, संविधान निर्माताओं की भावनाओं का सम्मान हो और हमारे संसदीय लोकतंत्र की गौरवशाली परंपराओं का मान कायम रहे, इस दिशा में मजबूती से चलने का संकल्प लेना भी इस वक्त की एक बड़ी जरूरत है। मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारा छत्तीसगढ़ हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं की आशाओं के अनुरूप सद्भाव और समरसता के रास्ते पर अडिग रहा, जिसके लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। झीरम गांव में आजादी के 73 साल बाद पहुंची बिजली मुख्यमंत्री ने कहा कि आकांक्षी जिलों की देशव्यापी डेल्टा रैंकिंग में बीजापुर देश में अव्वल आया। आकांक्षी जिलों के अन्य मापदण्डों में कोण्डागांव, नारायणपुर और सुकमा जिले ने भी अपना झण्डा गाड़ा। झीरम गांव में आजादी के 73 साल बाद बिजली पहुंचने की जितनी खुशी बस्तरवासियों को है, उससे अधिक खुशी हमें है। बस्तर में 400 के.व्ही. से लेकर 132 के.व्ही. का ऐसा अति उच्च दाब नेटवर्क बनाया गया, जिससे बस्तर में दोहरी-तिहरी बिजली आपूर्ति की व्यवस्था हो। बस्तर को दूरसंचार टॉवर व हवाई सेवाओं से जोड़कर सुगम सम्पर्क का एक नया युग भी शुरू किया गया।
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