Adv
adv Ftr

प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण जरूरीः भट्ट

 

गोपेश्वर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। चमोली जिला स्थित गोपेश्वर महाविद्यालय में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बोलते हुए पर्यावरण विद पद्मविभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण किए जाने पर जोर दिया। कहा कि आज प्राकृतिक जल स्रोत सूखते जा रहे है जो चिन्ता का विषय है। 
गुरुवार को महाविद्यालय गोपेश्वर में आयोजित कार्यशाला में भट्ट ने कहा कि हमारे जल स्रोत दिन प्रतिदिन विलुप्त होते जा रहे है। जिसका मुख्य कारण अवैज्ञानिक तरीके से वनों का दोहन है। जमीन में नमी के अभाव व पेड़ों के न होने से जलस्रोत सुखते जा रहे हैं। उन्होंने आम जन से इस ओर ध्यान देने की अपील की। 
यूसैक के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने बताया कि यूसैक राज्य के विभिन्न जलस्रोतों के अंतरिक्ष तकनीकी के माध्यम से अध्ययन कर आंकड़े एकत्र कर रहा है। इसी क्रम में यह कार्यशाला आयोजित की गई है। 
कार्यशाला की नोडल अधिकारी डाॅ आशा थपलियाल ने बताया कि यूसैक अलकनंदा, भागीरथी नदी समेत सात अन्य नदी घाटी के हिमनदो, जलस्रोतो, जलधाराओं का अंतरिक्ष तकनीकी के माध्यम से अध्ययन कर डाटाबेस तैयार कर रहा है। इसका उपयोग राज्य की जलनीति बनाने व राज्य की प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति के न्यूनीकरण में किया जाएगा। बताया कि जलवायु में हो रहे बदलाव का अध्ययन भी इसी तकनीकी के माध्यम से किया जा रहा है। यूसैक के वैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने कहा कि अंतरिक तकनीकी को आम जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
इस मौके पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ एके अवस्थी, डॉ नीलम रावत, सुरेंद्र सिंह लिंगवाल, डॉ अरविंद भट्ट, आरएस मेहता, डॉ डीएस नेगी आदि ने अपने विचार रखे।