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सीबीएसई अब लर्निंग आउटकम के आधार पर देगा नए स्कूलों को मान्यता

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्र सरकार ने देश में नए स्कूलों को मान्यता देने के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तीन दशक पुराने मानदंडों में संशोधन कर दिया है। सीबीएसई अब छात्रों को मिले शिक्षा के शिक्षण संबंधी परिणाम (लर्निंग आउटकम) के आधार पर नए स्कूलों को मान्यता देगी। स्कूलों को राज्यस्तर पर ही अब अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना होगा। 
यह जानकारी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीबीएसई मान्यता नियमावली में बदलाव कर दिया है। उल्लेखनीय है कि 1988 में पहली बार स्कूलों की मान्यता की नियमावली बनी थी और इसमें अंतिम बार 2012 में संशोधन किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए सीबीएसई स्कूलों के खोलने की प्रक्रिया को तेज और डिजिटल बनाने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले जिला शिक्षा प्रशासन द्वारा स्कूल के भूमि आवंटन, ढांचागत सुविधाएं और सर्टिफिकेट वैधता आदि की जांच करके एनओसी देता था। इसके बाद सीबीएसई पुन: अपने स्तर पर इसकी जांच करके एनओसी देता था। इससे केवल समय की बर्बादी होती थी और सीबीएसई पर भी काम का दबाव रहता था। 
उन्होंने कहा कि सीबीएसई अब ढांचागत सुविधाओं के बजाय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और शिक्षण केंद्रित जांच करेगा। इसमें छात्रों के शिक्षण स्तर में आए सुधार, नवोन्मेष, शिक्षकों की क्षमता और शिक्षकों का प्रशिक्षण आदि भी शामिल होगा। जावड़ेकर ने कहा कि हर साल लगभग दो हजार नए स्कूलों को मान्यता के आवेदन प्राप्त होते हैं। इससे इसमें काफी समय लगता था। इसी काे ध्यान में रखते हुए स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसमें आवेदन पर एक साल के भीतर ही विचार करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2007 से लंबित पड़े 8 हजार स्कूलों के आवेदनों का निपटारा कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की फीस में कोई हिडन कॉस्ट नहीं होनी चाहिए। सरकार इस पर विशेष ध्यान देगी। 
जावड़ेकर ने कहा कि भारत और 25 अन्य देशों में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त कुल 20 हजार 783 स्कूल हैं। इन स्कूलों में 1.9 करोड़ छात्र और 10 लाख शिक्षक हैं।