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सार

श्रीनगर की चिनार कोर ने 1972 में मारे गए मेजर की कब्र की मरम्मत कराई।

48 साल पहले नौगाम सेक्टर की मुठभेड़ में सिख लाइट के जवानों ने दिया था दुश्मन को करारा जवाब।

विस्तार

पाकिस्तान की ओर से आए दिन संघर्ष विराम उल्लंघन को नजरअंदाज करते हुए भारतीय सेना ने युद्ध में इंसानियत के उच्च मानक का उदाहरण पेश किया है। भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे नौगाम सेक्टर में करीब 48 साल पुरानी पाकिस्तानी मेजर की कब्र की मरम्मत कर नया रूप दिया है। कब्र के पत्थर पर लिखा है- मेजर मोहम्मद शबीर खान, सितार-ए-जुर्रत शहीद की याद में जो पांच मई, 1972 को 9 सिख लाइट की जवाबी कार्रवाई में मारे गए थे।

चिनार कोर ने कब्र की तस्वीर ट्वीट कर लिखा, चिनार कोर ने भारतीय सेना की परंपरा और विवेक का पालन करते हुए इस टूटे कब्र की मरम्मत कर उसे नया बनाया। दरअसल पांच मई, 1972 को नौगाम के फॉरवर्ड पोस्ट पर पाक और भारतीय सेना केबीच झड़प हुई थी। वहां तैनात सिख लाइट रेजिमेंट के जवानों ने पाकिस्तान की टुकड़ी को करारा जवाब दिया जिसमें पाकिस्तानी मेजर भारत की जमीन पर मारा गया।

इस घटना के कुछ साल बाद मेजर शबीर खान के पिता ने उस जगह आने की गुजारिश की जहां उनके बेटे ने जान गई थी। पाकिस्तानी पिता की इस गुजारिश को सेना ने मान लिया। मेजर शबीर के पिता ने बेटे की कब्र बनाने की इच्छा जाहिर की। उनके जाने के बाद सिख लाइट के सैनिकों ने कब्र बनाई और पत्थर पर संक्षिप्त वाक्या दर्ज कर दिया। समय के साथ टूट-फूट चुकी कब्र को चिनार कोर ने फिर सुधरवाया है। भारतीय सेना को टैग करते हुए चिनार कोर के इस ट्वीट को हजारों लोगों ने रिट्वीट किया। इनमें से कई ट्वीट पाकिस्तान से हैं, जिसमें भारतीय सेना के रुख की सराहना की गई है।

वीपी मलिक ने किया रिट्वीट

चिनार कोर के ट्वीट पर पूर्व जनरल वीपी मलिक ने रीट्वीट किया, करगिल युद्ध के समय भी भारत ने पाकिस्तानी जवानों और अधिकारियों के उन मृत शरीरों को पूरे सम्मन के साथ वापस किया जिन्हें पाकिस्तान ने स्वीकार किया। जिनको पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया उसे पूरे सम्मान और धार्मिक रिवाज के साथ भारत की जमीन पर ही दफन किया गया।

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