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मंडल डैम का शिलान्सास के साथ ही शुरू हो गया इसका विरोध

 


मेदिनीनगर, 05 जनवरी (हि.स.) । 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों शनिवार को उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शिलान साथ ही इसका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। विपक्षी दल इसे चुनावी स्टंट करार देते हुए इसके विरोध में खुलकर सामने आ गये।
झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय सचिव रवीन्द्र सिंह का आरोप है कि सोन पाईप लाईन योजना हुसैनाबाद से गुजरेगी, लेकिन इसका लाभ हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र के लोगों को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री मंडल डैम के नाम पर झारखंड की जनता व किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। मंडल डैम के निर्माण से झारखंड को नफा-नुकसान की बात अभी छोड़ भी दी जाय तो अहम सवाल है कि प्रधानमंत्री व भाजपा को अगर वास्तव में किसानों व जनता की फिक्र थी तो साढ़ें चार वर्षो तक इन्होंने इसकी सुध क्यों नहीं ली ? 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव केडी सिंह ने परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान परियोजना का लाभ पलामू के किसानों को नहीं मिल पायेगा। हिमालय से निकली गंगा का लाभ सिर्फ उत्तराखंड के लोगों को मिलता है,बिहार-बंगाल को लोगों को नहीं मिलता। क्या यह बताना पड़ेगा कि किसी भी नदी का लाभ उसके उद्गम स्थल के पहाड़ी लोगों को नहीं मिलता। जब वह नदी पहाड़ से निकलकर मैदानी इलाका में पहुँची है, तभी उसकी उपयोगिता ज्यादा दिखती है । आज जरूरत है निरन्तर सुखाड़ और अकाल की विभीषिका झेल रहे पलामू के किसानों की समस्या का भी स्थाई समाधान ढूँढ़ा जाए।
कांग्रेस नेता व पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी का कहना है कि पूरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने किसानों और मजदूरों की उपेक्षा की। अब चुनाव समीप आते ही गरीब और मजदूरों की याद आ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि विस्थापित हो रहे किसानों के मुआवजा के मसालों का पहले निष्पादन किया जाए। 

उल्लेखनीय है कि उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना की शुरुआत 1972 में ही हुई थी और लगभग दो-ढाई दशक तक निर्माण प्रक्रिया को बाद यह रूक गई थी। अब जो हो रहा है, वह अधूरी रह गई परियोजना के पूरा करने का नव-संकल्प है। इस परियोजना की शुरूआत में 30 करोड़ में पूरा होना था। लगभग 769 करोड़ खर्च हो चुके हैं और नए प्राक्कलन को मुताबिक अभी 1622 करोड़ से ज्यादा और खर्च होंगें। इसमें कुल 1,11,800 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता बढ़ जाए, तो भी कुछ कम नहीं होगा। इसमें 80 प्रतिशत यानि 91,917 एकड़ कृषि योग्य भूमि बिहार की और लगभग 20 प्रतिशत यानी 19604 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि झारखंड की सिंचित होने की बात कही गई है। लगभग 5 वर्ष के दौरान मोदी सरकार और लगभग 4 वर्ष की रघुवर दास की राज्य सरकार द्वारा पलामू प्रमंडल में किया जाने वाला यह सबसे महात्वाकाँक्षी परियोजना है और सरकार इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शिलान्यास के बाद एक बेहतरीन ईवेंट साबित करने का प्रयास किया है। लगभग 1170 करोड़ की इस परियोजना से 14240 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी तो 3.28 लाख लोगों की पेयजल समस्या का निदान मिल जाने की संभावना जताई जा रही है।

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