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एनआरआई के निवल दावे में 18.5 मिलियन डॉलर की कमी

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2018 अंत तक भारत के अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं। इसके तहत भारत पर अनिवासी भारतीयों के निवल दावे पिछली तिमाही की समाप्ति के स्तर से 18.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक कम हो गए हैं। इसमें 3.6 फीसदी तक की गिरावट आई है। 
आरबीआई की ओर से बताया गया कि भारतीय निवासियों की समुद्रपारीय वित्तीय आस्तियां की तुलना में भारत में विदेशी स्वामित्व वाली आस्तियों में तेज गिरावट के कारण ही सकल दावों में गिरावट हुई है। विदेशों में भारतीय निवासियों की वित्तीय आस्ति पिछली तिमाही में 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक घट गई है। मुख्य रूप से आरक्षित आस्तियों में कमी के बावजूद विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि हुई है।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में विदेशी स्वामित्व वाली आस्ति में 22.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक की गिरावट आई है। मुख्य रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और पोर्टफोलियो निवेश, व्यापार ऋण में कमी के कारण यह गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, तिमाही आधार पर विदेशी स्वामित्व वाली आस्ति में मामूली वृद्धि हुई है। तिमाही के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्यह्रास ने अनिवासियों के निवल दावों को कम करने में सहयोग दिया है। भारत की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय आस्तियां के लिए दो-तिहाई आस्तियां आरक्षित की गई हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय देयताओं की तुलना में भारत की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय आस्तियों का अनुपात सितंबर 2018 में 60.7 प्रतिशत रहा है। जून 2018 में यह 59.82 प्रतिशत रहा था।
सितंबर 2017 में नेट आईआईपी (विदेशी संस्थाहत निवेश) के तहत जहां कुल निवेश में 397.5 बिलियन डॉलर की कमी आई थी| दिसंबर 2017 में इसमें 422.3 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि मार्च 2018 में थोड़ा सुधार हुआ और 419.9 बिलियन डॉलर की कमी आई थी। जून में 410.4 बिलियन डॉलर और सितंबर 2018 में 391.9 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि आईआईपी ने सितंबर 2017 तक संपत्ति के रूप में 600.9 बिलियन डॉलर उपलब्ध कराए थे, जबकि डायरेक्ट निवेश के तहत 153.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया था। सितंबर 2018 में इसमें मामूली बढ़त देखी गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने संपत्ति के रूप में 606 बिलियन डॉलर उपलब्ध कराए थे, जबकि डायरेक्ट निवेश के तहत 163 बिलियन डॉलर का निवेश किया। पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट के तहत इक्विटी मार्केट में 2.4 बिलियन डॉलर का निवेश सितंबर 2017 में किया गया था, जो सितंबर 2018 में घटकर 0.9 बिलियन डॉलर रह गया। ट्रेड क्रेडिट, लोन और करेंसी डिपॉजिट औसत में भी भारी कमी दर्ज की गई है। 

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