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रायपुर, 28 जनवरी (ह‍ि.स.)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जल्दी ही कोदो और कुटकी का भी समर्थन मूल्य घोषित करेगी। इससे इन लघु धान्य फसलों के उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत की सही कीमत मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कांकेर कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में स्वसहायता समूहों की महिलाओं और किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इन उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर अच्छी पैकेजिंग, मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कवासी लखमा, ग्रामोद्योग एवं जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्र कुमार, विधानसभा के उपाध्यक्ष मनोज मण्डावी, संसदीय सचिव शिशुपाल शोरी, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और विधायकगण मोहन मरकाम और अनूप नाग भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री बघेल ने अपने दो दिवसीय कांकेर प्रवास के पहले दिन कृषि विज्ञान परिसर में लघु धान्य प्रसंस्करण इकाई, कृषक छात्रावास और बालक छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने लघु धान्य प्रसंस्करण इकाई और लाख प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने किसान विकास समिति घोटुलमुड़ा की महिलाओं को लघु धान्य प्रसंस्करण कार्य का चेक प्रदान करने के साथ ही कोदो प्रसंस्करण मशीन प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत् स्वसहायता समूहों को रागी एवं कोदो-कुटकी के वितरण के लिए मुख्यमंत्री ने कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर से वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्वसहायता समूहों की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में धान, गन्ना, मक्का, तिली, सरसों, कोदो-कुटकी, तिखूर, ईमली, चिरौंजी और महुआ जैसे उत्पादों के साथ ही अनेक वनौषधियों का भी उत्पादन होता है। इन वनोपजों और वनौषधियों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोग अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अब 52 तरह के वनोपजों की खरीद कर रही है। इससे भी वनवासियों को आर्थिक लाभ हो रहा है। बस्तर की वन संपदा का स्थानीय लोगों के हित में बेहतर उपयोग होना चाहिये। कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे ने कहा कि कांकेर कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का पूरे प्रदेश में विस्तार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सुझाव के अनुरूप जल संसाधन विभाग बस्तर की सभी नदियांे का संरक्षण कर सिंचाई परियोजना विकसित करने पर काम करेगी। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, कृषि विभाग के सचिव अमृत खलखो, कलेक्टर चन्दन कुमार, कांकेर कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बीरबल साहू तथा लघु धान्य व लाख प्रसंस्करण इकाई के प्रभारी अधिकारी नरेन्द्र तायडे भी मौजूद थे।
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