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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार में शहरी अवसंरचना से जुड़ी सात महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रहे इस कार्यक्रम में जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है  उनमें से चार परियोजनाएं जल आपूर्ति से संबंधित हैं। साथ ही दो जल-मल शोधन संयंत्र व एक परियोजना रिवर फ्रंट डेवलपमेंट से संबंधित है। इन सभी परियोजनाओं की लागत 541 करोड़ रुपये है।


पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की मुख्य बातें

- आत्मनिर्भर बिहार आत्मनिर्भर भारत मिशन को देगा गति

- सरकार का प्रयास है कि गंगा के किनारे बसे जितने भी शहर हैं, वहां गंदे नालों का पानी सीधे गंगा जी में गिरने से रोका जाए। इसके लिए अनेकों वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाए जा रहे हैं। आज जो बेऊर और करम-लीचक की योजना का उद्घाटन हुआ है, उससे इस क्षेत्र के लाखों लोगों को लाभ होगा।

- बिहार के लोगों का तो गंगा जी से बहुत ही गहरा नाता है। गंगा जल की स्वच्छता का सीधा प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ता है। गंगा जी की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ही बिहार में 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 50 से ज्यादा परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

- आज आवश्यक है कि हमारे शहरों में संभावनाएं हों, समृद्धि हो, सम्मान हो, सुरक्षा हो, सशक्त समाज हो और आधुनिक सुविधाएं हों।

- शहरीकरण आज के दौर की सच्चाई है। लेकिन कई दशकों से हमारी एक मानसिकता बन गई थी, हमने ये मान लिया था जैसे कि शहरीकरण खुद में कोई समस्या है, कोई बाधा है। लेकिन मेरा मानना है, ऐसा नहीं है। ऐसा बिलकुल भी नहीं है।

- बिहार देश के विकास को नई ऊंचाई देने वाले लाखों इंजीनियर देता है। बिहार की धरती तो आविष्कार और इनोवेशन की पर्याय रही है। बिहार के कितने ही बेटे हर साल देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में पहुंचते हैं, अपनी चमक बिखेरते हैं।

- बीते एक साल में, जल जीवन मिशन के तहत पूरे देश में दो करोड़ से ज्यादा पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं। आज देश में हर दिन एक लाख से ज्यादा घरों को पाइप से पानी के नए कनेक्शन से जोड़ा जा रहा है। स्वच्छ पानी, न सिर्फ जीवन बेहतर बनाता है बल्कि अनेक गंभीर बीमारियों से भी बचाता है।

- अब केंद्र और बिहार सरकार के साझा प्रयासों से बिहार के शहरों में पीने के पानी और सीवर जैसी मूल सुविधाओं में निरंतर सुधार हो रहा है। मिशन अमृत और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बीते चार-पांच सालों में बिहार के शहरी क्षेत्र में लाखों परिवारों को पानी की सुविधा से जोड़ा गया है।

- बीते डेढ़ दशक से नीतीश जी, सुशील जी और उनकी टीम समाज के सबसे कमजोर वर्ग में आत्मविश्वास को लौटाने का प्रयास कर रही है। जिस प्रकार बेटियों की पढ़ाई को, पंचायती राज सहित स्थानीय निकाय में वंचित, शोषित समाज की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है, उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

- जब शासन पर स्वार्थनीति हावी हो जाती है, वोटबैंक का तंत्र सिस्टम को दबाने लगता है, तो सबसे ज्यादा असर समाज के उस वर्ग को पड़ता है, जो प्रताड़ित है, वंचित है, शोषित है। बिहार के लोगों ने इस दर्द को दशकों तक सहा है: 

- सड़कें हो, गलियां हों, पीने का पानी हो, सीवरेज हो, ऐसी अनेक मूल समस्याओं को या तो टाल दिया गया या फिर जब भी इनसे जुड़े काम हुए वो घोटालों की भेंट चढ़ गए।

- आज का ये कार्यक्रम, एक विशेष दिन पर हो रहा है। आज हम इंजीनियर्स डे मनाते हैं। ये दिन देश के महान इंजीनियर एम विश्वेश्वरैया जी की जन्म-जयंती का है, उन्हीं की स्मृति को समर्पित है।

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