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कुम्भ में मिल रहा ज्योति प्रकाश, पश्चिम बंगाल के चिकित्सक कर रहे जांच

कुम्भ नगरी (प्रयागराज), 11 फरवरी (हि.स.)। कुम्भ में नेत्र कुम्भ की चर्चा के बीच एक और स्थान पर नेत्र जांच शिविर लगा है। जिस शिविर के चिकित्सक डॉ. जितेन्द्र गगलानी के सेवा भाव की चर्चा आम हो रही है। उनके द्वारा सुबह नौ बजे से रात्रि दस बजे तक लगातार बिना रुके कल्पवासियों के आंखों की जांच की जा रही है। 

कुम्भ नगरी में सेक्टर 13 में तुलसी मार्ग पर गोवर्धनपुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने पश्चिम बंगाल के एक सेवा संस्था को अपने यहां आमंत्रित किया है। संस्था के चिकित्सक डॉ. जितेन्द्र लगातार सेवा कार्य करते रहें है। उन्होंने लगातार एक लाख नेत्र रोगियों को देखने का कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इन दिनों वह कुम्भ में नेत्र रोगियों को देख रहे है। एक दिन में उन्होंने 1200 से ज्यादा रोगियों को देखा है। 

नेत्र जांच के लिए एक अत्याधुनिक मशीनयुक्त वाहन खड़ी है। जिसमें बारी बारी से नेत्र मरीज अपनी आंखों को दिखाने के लिए जाते हैं। वाहन के भीतर जांच करने वाले चिकित्सक उनकी जांच कर चश्मे का नम्बर लिख देते हैं और फिर उनको बाहर टेंट में चश्मा मिल जाता है। इन मरीजों में महिलाओं और बूढ़े लोगों की संख्या पर्याप्त है। 
डॉ. जितेन्द्र अपने बारे में बताते हैं कि उनको सेवा कार्य करना बहुत पसंद है। वह कुम्भ में शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद का आशीर्वाद प्राप्त करने आए थे। जब उनके मन में यहां रहते हुए नेत्र जांच शिविर लगाने की इच्छा हुई, फिर वह अपने साथ अत्याधुनिक नेत्र जांच एम्बुलेंस वाहन भी लेते आए। वह जितने दिन रुकेंगे, सेवा कार्य करते रहेंगे। 

इस बाबत शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद ने बताया कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। व्यक्ति के जीवन में ज्योति प्रकाश का महत्व है। व्यक्ति की ज्योति बची रहे, इसके लिए उनके शिष्य ने अहम प्रयास किया है। वह सुबह से रात्रि तक नेत्र मरीजों की जांच भी कर रहे हैं। वह पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आए हैं। 
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों बूढ़ी दादी की आंखों की जांच के बाद जब उसे चश्मा मिला, तो वह रोने लगी। महिला के आंखों की ज्योति लौट आयी थी। उसे सब कुछ स्पष्ट दिखने लगा तो वह अपना कष्ट उनको बताने लगी। इस प्रकार किसी के जीवन में ज्योति बनाए रखने का प्रयास उत्तम है, इससे बड़ी सेवा कुछ नहीं है।

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