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गोरखपुर, 02 जनवरी (हि.स.)। कड़ाके की ठण्ड जारी है। ऐसे में सभी का ठण्ड से बचना और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना बेहद जरुरी है। इस सर्द मौसम में नवजात शिशुओं की देखभाल और उनके स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतनी बहुत जरुरी है। कैसे रखें नवजात को, क्या बरतें सावधानियां इसके बारे में गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अरबिंद कुमार ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि मौसम के मिजाज में आ रहे बदलाव को देखते हुए नवजात शिशु के देखभाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ठण्ड की चपेट में आने से बच्चे,निमोनिया खांसी,जुकाम और बुखार के शिकार हो सकते हैं। सर्दी का मौसम विभिन्न रोगाणुओं और वायरस को संक्रमित करने और मेजबानों को खोजने के लिए काफी अच्छा समय होता है। कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र के कारण नवजात शिशु विभिन्न बीमारियों का आसानी से केंद्र बन जाता है। नवजात शिशुओं में बड़ों की तुलना में तेजी से गर्मी कम हो जाती है, और वे ठंड का सामना करने में सक्षम नहीं होते हैं। बताया कि इस मौसम में बच्चोंं में पानी की कमी भी और पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या भी सामने आती है। ऐसे में नवजात शिशु और बच्चोंं को गर्म कपड़ा पहनाकर रखें। अपने बच्चे को लेयर्स में कपड़े पहनाएं। बच्चे का प्रैम ठीक से कवर करें आमतौर पर आप बच्चे के प्रैम में एक कंबल बिछाते हैं जिससे उसको गर्मी का एहसास होता रहे। ध्यान रहे की इससे प्रैम के अंदर हवा का प्रवाह कम हो इसलिए बीच-बीच में कवर हटाते रहें। कमरे का तापमान ठीक रखें। अपने बच्चे की त्वचा को नरम बनाए रखने के लिए एक अच्छे बॉडी लोशन का उपयोग करें। विशेष रूप से सर्दियों में अपने नवजात शिशु की मालिश करें ताकि रक्त प्रवाह और प्रतिरक्षा स्तर में सुधार हो सके। मालिश के लिए जैतून, बादाम व नारियल तेल का इस्तेमाल करें बच्चे की मालिश करने के लिए जैतून का तेल, बादाम का तेल या नारियल तेल का उपयोग कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि आप दरवाजा बंद कर दें और जब आप अपने बच्चे की मालिश कर रहे हों तो कमरे को गर्म रखें। अपने बच्चे को नियमित रूप से गुनगुने पानी से स्नान कराएं। बच्चों को मां का दूध पिलाएं। मां के दूध से बच्चों को बीमारी से लड़ने की शक्ति मिलती है। सांस तेज होने पर मां अपना दूध पिलाएं। सर्दी में बच्चों के डायपर हमेशा बदलते रहें। बच्चोंं में पानी की कमी न हो इसके लिए उन्हें नियमित रूप से पानी देते रहे। कोई भी समस्या होने पर तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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