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बचई बीट में बाघ की आमद से वन विभाग उत्साहित, ग्रामीण दहशत में

नरसिंहपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। वर्ष 2018 के फरवरी माह में बचई बीट के जंगल में आमानाला के पास वन विभाग के अधिकारियों नजर आया बाघ अब भी क्षेत्र की तफरी कर रहा है। जंगल में बाघ की आमद वन विभाग तो उत्साहित है, लेकिन इस क्षेत्र के वाशिंदे लंबे समय से दहशत में हैं। कभी बाघ का प्रत्यक्ष सामना, तो कभी उसके पद चिन्ह आबादी की दहशत बढ़ा रहे हैं। गत दिसंबर माह में इसी क्षेत्र में कन्हारपानी के पास अपने खेत मे काम कर रहा युवक अशोक पटैल बाघ के हमले में बाल-बाल बचा था। इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी गयी थी। इसी क्षेत्र के ग्राम सिहोरा में फिर शुक्रवार को बाघ के पदचिन्ह देखे गये। इससे ग्रामीण चिंतित हो गये। इनकी चिंता यह है कि बाघ की आबादी क्षेत्र में पैठ बढ़ती जा रही है और वन विभाग कोई कार्रवाई की बजाए ग्रामीणों को ही संभलकर रहने की हिदायत दे रहा है।

चोर घाट के पास गुफाओं में रह रहा बाघ

ग्राम सिहोरा के महेंद्र ठाकुर, चेतराम, देवी सिंह, नन्हे लाल, अशोक पटैल, गोविंद, लेखराम, भीकम सिंह आदि वाशिंदों ने बताया कि ग्राम सिहोरा शेढ़ नदी से सटा हुआ है, जहां बाघ का आना-जाना लगा रहता है। अनेक बार हुई क्षेत्र में बाघ की आमद से अब ग्रामीण उसके पदचिन्ह भी पहचानने लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक 10 जनवरी की रात्रि को बाघ उनके गांव को घेरते हुए नदी में पहुंचा था, 11 जनवरी को गांव में मिले बाघ के पदचिन्ह इसका प्रमाण है। उन्होंने बताया कि बाघ रात को ही निकलता है। ऐसे में रात को शिफ्ट बदलने खेत में जाने वाले किसानों के लिए वह बड़ा खतरा है। कई किसानों ने तो रात के वक्त खेत जाना ही बंद कर दिया है, जिससे उनको आर्थिक क्षति हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार उक्त बाघ शेढ़ नदी में चोर घाट के पास बनी गुफाओं में अपना डेरा डाले हुए है। ग्रामीणों के साथ कोई घटना हो, इसके पूर्व वन विभाग को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

क्या किसी घटना के बाद जागेगा विभाग?

वन विभाग ने इस संबंध में बताया कि बाघ या शेर का जंगली क्षेत्र बहुत बड़ा होता है। यहां वन्य अनुकूलता के कारण बाघ की चहल कदमी बढ़ी है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसमें बाघ द्वारा किसी पर हमला किया गया हो। वन विभाग ने माना कि बचई से लेकर जैतपुर, लालपुल के जंगल तक बाघ की उपस्थिति पायी गयी है और बाघ की आवाजाही भी सिर्फ जंगल से जंगल में ही है। लेकिन कुछ घटनाएं बताती हैं कि शेर गांवों का रूख भी कर रहा है। क्या किसी घटना के बाद वन विभाग की नींद खुलेगी?

इनका कहना है

हम चारों ओर बाघ की निगरानी कर रहे हैं, आबादी को उससे कोई खतरा नही है। अभी तक ऐसा कोई मामला भी प्रकाश में नही आया कि बाघ अचानक किसी के सामने आ गया हो। वह बबरिया-लालपुर होते हुए बहुत बड़े वन्य क्षेत्र में चहल-कदमी कर रहा है। यदि सिहोरा में उसकी उपस्थिति पायी गयी है तो जांच करवा लेते हैं।

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