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दोपहिया वाहनों पर जीएसटी की दरों पर पुनर्विचार की जरूरत हैः श्रीनिवासन

मुंबई। टीवीएस मोटर कंपनी के अध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन ने ऑटो सेक्टर पर लगनेवाले जीएसटी की दर को लेकर सरकार से पुनर्विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि खासकर दोपहिया सेगमेंट में बढ़ती मांग को देखते हुए इस पर जीएसटी दर में कमी की जानी चाहिए। इस सेगमेंट की बेहतरी के लिए दोपहिया वाहनों पर जीएसटी की दरों को लेकर चर्चा होनी चाहिए। वाहन निर्माता कंपनियों की बिक्री में कमी आ रही है।
टीवीएस मोटर कंपनी के अध्यक्ष श्रीनिवासन ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ ही लोगों की क्रय शक्ति भी बढ़ रही है। विशेष रूप से पूरे भारत के मध्यम आय वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ी है। दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के साथ ही देश के तमाम छोटे शहरों में भी लोगों का रुझान बेहतर कनेक्टिविटी की ओर बढ़ा है। कनेक्टिविटी के बेहतर साधनों की आवश्यकता ने व्यक्तिगत गतिशीलता के लिए दोपहिया सेगमेंट को बढ़ावा दिया है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के साथ ही सामूहिक गतिशीलता के लिए एक आइटम के रूप में भी दोपहिया सेगमेंट का महत्व बढ़ा है। दोपहिया वाहनों के लिए जीएसटी दरों पर सरकार को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। दोपहिया वाहनों पर निश्चित रूप से 28 फीसदी और उस पर लक्जरी वस्तुओं के लिए प्रचलित जीएसटी दरों को नहीं लगाया जा सकता है। इसके लिए कोई तय बेंचमार्क भी नहीं बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में एकीकृत बहु-मॉडल सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ विसंगतियों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए दोपहिया वाहनों के निर्माण में बढ़ोतरी हुई है| दोपहिया वाहनों की बिक्री व डिमांड बढ़ती जा रही है। दोपहिया निर्माता कंपनियों ने नए सुरक्षा मानदंडों के साथ साथ बीएसवीआई एकीकरण (इंटिग्रेसन) पर जोर दिया है। इससे दोपहिया वाहनों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। इसलिए दोपहिया वाहन सेक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए जीएसटी की दरों पर पुनर्विचार की जरूरत है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में टिके रहने में आसानी हो सके। 
दोपहिया वाहनों पर इंजन क्षमता के तहत जीएसटी लागू की गई है। 350 सीसी क्षमता वाले दोपहिया वाहनों पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। पहले 30 फीसदी का टैक्स थी। हालांकि 350 सीसी क्षमता से अधिक दोपहिया वाहनों पर 31 फीसदी (28 फीसदी जीएसटी+3 फीसदी सेस) जीएसटी वसूला जाता है। इससे वाहनों की बिक्री मार्जिन पिछले एक साल से काफी कम हो गई है। 

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