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लकवाग्रस्त हुआ प्रदूषण विभाग, लाखों जिंदगी खतरे में

बागपत, 15 दिसम्बर (हि.स.)। प्रदूषण विभाग अपना काम जिम्मेदारी से करे तो बागपत की आने वाली पीढ़ी सुकून से जीवन जी सकेगी लेकिन विभाग अपना काम न तो ईमानदारी से कर रहा है और न ही जल प्रदूषण फैलाने वालों पर कारवाई को तैयार है। तीन दिन पहले छापामारी कर खानापूर्ति करने वाले विभाग ने आज तक न तो कोई नोटिस भेजा है और न ही इन फैक्ट्रियों के खिलाफ नियमानुसार कारवाई की है। अगर प्रदूषण विभाग इसी तरह लापरवाह बना रहा तो स्थिति काफी बिगड़ सकती है। 
बागपत में प्रदूषण विभाग आबोहवा को जहरीला बना रही अवैध फैक्ट्रियां पर किसी प्रकार की कोई सख्ती नहीं दिखा रही है। इस वजह से ये फैक्ट्रियां दिनों—दिन और ज्यादा जहर उगल रही हैं। आलम यह है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह बच रहा है, जबकि उसका गठन ही प्रदूषण रोकने के लिए किया गया था। 
...3, फरवरी 1975 को हुआ था बोर्ड का गठन ये है विभाग का काम 
भारत सरकार द्वारा जन स्वास्थ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण जनित समस्याओं के प्रभावी निराकरण हेतु अधिनियमित जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 4 के प्राविधानों के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा 3 फरवरी 1975 को उत्तर प्रदेश जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण बोर्ड का गठन किया गया। वर्ष 1981 में भारत सरकार द्वारा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 अधिनियमित किया गया। इस अधिनिमय के अन्तर्गत गठित राज्य बोर्ड को ही वायु प्रदूषण के निवारण तथा नियंत्रण का दायित्व सौंपा गया। 13 जुलाई, 1982 से राज्य सरकार द्वारा उक्त बोर्ड का नाम बदलकर ,उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विनिर्दिष्ट कर दिया गया। राज्य बोर्ड के वित्तीय संसाधन सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) उपकर अधिनियम, 1977 पारित किया गया। भारत सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भी अधिनियमित किया गया, जिसके अन्तर्गत विहित प्राविधानों के अनुसरण में तत्सम्बन्धी शक्तियों भी भारत सरकार द्वारा राज्य बोर्ड को प्रत्यायोजित की गयी। प्रदेश में प्रदूषण की रोकथाम के लिए लखनऊ स्थित मुख्यालय के अतिरिक्त 27 क्षेत्रीय कार्यालयों एवं उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया।
........एनजीटी के आदेशों के बाद जागता है विभाग 
बागपत में वायू और जल प्रदूषण को लेकर जिला स्तर से समय समय पर उपजिलाधिकारियों द्वारा जांच की जाती है। लेकिन चूंकि कारवाई का अधिकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को है इसलिए सख्त कारवाई नहीं हो पाती है। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों को बार—बार पत्राचार करने के बाद भी विभाग उदासीन बना रहता है। इसका खामियाजा बागपत की जनता को भुगतना पड़ रहा है। जिले के अंदर ऐसे मरीज हैं, जो कैंसर से पीड़ित हैं। हाल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंसर पीड़ित मरीजों की तलाश की थी जिसमें नये मरीज सामने आये हैं। इसमें प्रदषूण भी अहम कारण है। अगर समय रहते प्रदूषण विभाग ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई तो बागपत में लाखों लोग पानी जनित रोगों का शिकार होंगे और उनकी जिंदगी का जिम्मेदार प्रदूषण विभाग होगा।
विभाग इतना लापरवाह है कि कई बार एनजीटी के आदेश होने के बाद ही कारवाई कर पाता है। यही वजह है कि जनपद में प्रदूषण की शिकायतें विभाग के पास कम एनजीटी में ज्यादा पहुंच रही है। वहीं जब इस सम्बन्ध में महकमे से बात की गई तो विभाग के जई एसपी सिंह का कहना है कि वे जल्द ही सभी फैक्ट्रियों की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कारवाई करेंगे। कर्मचारियों की काफी कमी है। इस वजह से क्षेत्र में जाने का समय कम मिल पाता है। 

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