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मूल्य बड़ा ही व्यापक शब्द,जीवन मूल्यों से ही बना-अर्चना

वाराणसी, 03 नवम्बर(हि.स.)। मूल्य बड़ा ही व्यापक शब्द है। मूल्य वह है जो जीवन के लिए शुभ है। जीवन मूल्यों से ही मूल्यवान बनता है। 
यह बातें शनिवार अपरान्ह बसंता कन्या पीजी कालेज के दर्शन विभाग की डाॅ.अर्चना तिवारी ने कही। अवसर रहा आर्य महिला पीजी कालेज में दर्शन विभाग की ओर से आयोजित विमर्श विषयक गोष्ठी का। 
डा.अर्चना ने कहा कि मूल्य चाहे व्यवहारिक हों चाहे सामाजिक हो या धार्मिक, इसका उपयोग एवं व्यवहार में प्रयोग ही जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त कराती है।
गोष्ठी में नालंदा कालेज दर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो.अविनाश श्रीवास्तव ने बतौर मुख्य वक्ता 'शांति और अहिंसा की संस्कृति बुद्ध एवं गांधी के परिप्रेक्ष्य में' विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जहां तक भारतीय परिवेश में शांति की
परिकल्पना और प्रयोग का संदर्भ हैं। तो यह उतनी ही प्राचीन है जितनी की मानव सभ्यता। क्योंकि शांति का सैद्धांतिक मूल अर्थ ‘सामंजस्य युक्त सामाजिक परस्पर सहयोगात्मक जीवन पद्धति है। बुद्ध हो या गांधी दोनों ने मनसा वाचा कर्मणा,हिंसा के अभाव या अहिंसा की स्थिति को शांति की संज्ञा दी हैं। 
इसके पूर्व अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्र्यापण कर गोष्ठी का आगाज किया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्या रचना दूबे,संचालन डाॅ. अनामिका सिंह,धन्यवाद ज्ञापन डाॅ ममता गुप्ता ने किया। गोष्ठी में कालेज के प्रबन्धक डाॅ. शशिकान्त दीक्षित, डाॅ. असंग पाउ, डाॅ. संध्या श्रीवास्तव, डाॅ. शुचि तिवारी, डाॅ. ऋचा मिश्रा आदि की खास उपस्थिति रही।