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गंगा दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी

 

हरिद्वार, 03 सितम्बर (हि.स.)। गंगा के बारे में वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) का कहना है कि गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है।
वर्ल्ड वाइड फंड की यह रिपोर्ट इसलिए भी चिंताजनक है कि सरकारों से लेकर आमजन मानस तक गंगा को बचाने के लिए अभियान चलाए हुए हैं। अब तक गंगा की सफाई पर अरबों रुपया भी खर्च किया जा चुका है। ऐसे में वर्ल्ड वाइड फंड की ऐसी रिपोर्ट आना चौंकाने वाला और आमजन मानस का और सचेत करने वाली है। 
देश की सबसे प्राचीन और 2525 किमी लंबी नदी गंगा उत्तराखंड में हिमालय के गोमुख से निकलती है। गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सिंचती है। 
गंगा नदी के रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, घाघरा, ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं जबकि दक्षिण के पठार से आकर मिलने वाली प्रमुख नदियों में चंबल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि शामिल हैं।
यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बन्दरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखण्ड से निकलती है। गंगा पांच देशों के 11 राज्यों में करीब 50 करोड़ से अधिक लोगों का भरण-पोषण करती है। हमारे ग्रंथों में गंगा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। 
गंगा किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं। इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है। कानपुर की ओर 400 किमी उलटा जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है। इस शहर के साथ गंगा का गतिशील संबंध अब बमुश्किल ही रह गया है। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं। जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है। 

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