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Launch of the book "Modern Iranian Poems"

"आधुनिक ईरानी कविताएं" पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली के रविंद्र भवन स्थित साहित्य अकादमी मुख्यालय में बुधवार को "आधुनिक ईरानी कविताएं" पुस्तक का लोकार्पण हुआ। इसमें पिछले 100 साल की ईरानी शायरी का प्रतिनिधि रूप प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में 99 शायरों को चुना गया है। इस संकलन में शास्त्रीय ईरानी कविता से लेकर आधुनिक ईरानी कविता के अलग-अलग मिजाजों को पढ़ा जा सकता है।

इस अवसर पर साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव, ईरान कल्चर हाउस के सांस्कृतिक परामर्शदाता मोहम्मद अली रब्बानी, तेहरान के अनुवाद विभाग की निदेशक सईदा हुसैनजानी, ईरान कल्चर हाउस के उपसांस्कृतिक सलाहकार अली रज़ा कज़वे, एनसीईआरटी के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. जे.एस. राजपूत, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अख़्लाक आहन और पुस्तक के अनुवादक अज़ीज़ महदी उपस्थित थे। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण ईरानी कवि एवं अनुवादक तथा साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

साहित्य अकादमी के सचिव श्रीनिवासराव ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और ईरान के प्राचीन सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों ही संस्कृतियों में कविता को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। सही मायनों में दोनों देश कविताओं के ही देश हैं। साहित्य अकादमी इस तरह के परस्पर अनुवाद की श्रृंखला आगे भी जारी रखेगी।

ईरान कल्चर हाउस के सांस्कृतिक परामर्शदाता मोहम्मद अली रब्बानी ने कहा कि दो देशों को जानने का सबसे अच्छा तरीका साहित्य ही है। विभिन्न देशों के बीच यह संवाद का सबसे बेहतर और सुंदर रास्ता है। इससे ही हम एक-दूसरे के नजदीक आकर एकता का सेतु बनाते हैं। उन्होंने ईरान और भारत के बीच दो हजार साल पुराने अनुवाद के रिश्ते को याद करते हुए आशा व्यक्त की कि यह सिलसिला आगे भी कायम रहेगा।

तेहरान के अनुवाद विभाग की निदेशक सईदा हुसैनजानी ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कविता की जरूरत और अनुवाद विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयासों की चर्चा की।

अली रजा कज़वे ने अनुवाद की जरूरत और ईरानी संस्कृति में कविता की महत्ता को बताते हुए कहा कि ईरान में सभी कला माध्यमों में कविता का प्रथम स्थान है।

जेएनयू के प्रोफेसर अख़्लाक आहन ने पुस्तक के बारे में बताया कि इसमें पिछले 100 साल की ईरानी शायरी का प्रतिनिधि रूप प्रस्तुत किया गया है। इसमें 99 शायरों को चुना गया है। इस संकलन में हम शास्त्रीय ईरानी कविता से लेकर आधुनिक ईरानी कविता के अलग-अलग मिजाजों को पढ़ सकते हैं।

अंत में पुस्तक के हिंदी अनुवादक अजीज महदी ने इस पुस्तक को साकार बनाने में किए गए सहयोग के लिए साहित्य अकादमी और दिल्ली के ईरान कल्चर हाउस के सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद देते हुए संग्रह से कुछ कविताएं प्रस्तुत कीं।


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