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NOW THERE WILL BE NO RELIEF FROM RAIN

अभी नहीं मिलेगी बारिश से राहत, फायदेमंद रहेगी अमेरिकन ब्युटी की खेती

बेगूसराय, 15 सितम्बर (हि.स.)। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान का बेगूसराय में दूसरे दिन बुधवार को भी व्यापक असर पड़ा है। दिन भर रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम में अभी चार दिनों तक बारिश से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। शहर में गंदगी के बीच रह रहे लोगों को बारिश के कारण भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। गांव और पशुपालकों की हालत भी बदतर हो गई है, फसल डूबने के कारण हरा चारा के लिए पहले से परेशान हो रहे पशुपालकों की परेशानी बारिश के कारण और बढ़ गई है। गन्ना की फसल को भारी क्षति पहुंची है। कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. रामपाल ने 19 सितम्बर तक बारिश की संभावना जताई गई है।

डॉ. रामपाल ने बताया कि आकाश में बादल छाए रहेंगे। 16 सितम्बर को 10.4 मिलीमीटर, 17 सितम्बर को 2.5 मिलीमीटर, 18 सितम्बर को 19.5 मिलीमीटर तथा 19 सितम्बर को 8.3 मिलीमीटर बारिश होने की संभावना है। 17 सितम्बर तक पूर्वा हवा चलने वाली है, उसके बाद पछुआ हवा से मौसम में बदलाव होगा। मौसम के हिसाब से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के लिए एडवाइजरी जारी किया गया है। डॉ. रामपाल ने बताया कि धान की फसल में 30 किलोग्राम नेत्रजन प्रति हक्टेयर की दर से उपरिवेशन करें। धान की फसल दुग्धाअवस्था में आ गयी हो तो उसमे गंधी बग कीट की नियमित रुप से निगरानी करें। फसल में तना छेदक (स्टेम बोरर) एवं पत्ती लपटक (लीफ फोल्डर) कीट की निगरानी करें। पत्ती लपेटक कीट के पिल्लू धान के पत्तियों के दोनों किनारों को रेशमी धागे से जोड़कर उसके अन्दर रहते हैं तथा पत्तियों की हरीत्तिमा को खा जाते हैं। इससे बचाव के लिए करताप हाईड्रोक्लोराईड दाने-दार दवा का दस किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से व्यवहार करें। किसान भाई नेत्रजन खाद के साथ बताई गयी कीटनाशक दानेदार दवा को अच्छी प्रकार से मिलाकर खेतों में समान रुप से व्यवहार कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि लत्तीदार सब्जियों की फसल में फल मक्खी कीट की निगरानी करें। वर्तमान नमीयुक्त गर्म मौसम इस कीट के प्रकोप के लिए अनुकल है। मादा मक्खी लत्तीदार सब्जियों के कोमल फलों के अन्दर अण्डे दती है। ग्रसित फलों के छेद से लसदार हल्के भूरे रंग का द्रव निकलता है जो सुखने पर खुरदरे खुरट का रुप ले लेता है। अण्डे से मैगोट बनते ही वह गुद्द को खाकर स्पज जैसा छेद कर देता है। अरहर की बुआई अविलंब संपन्न करने का प्रयास करें। इसके लिए पूसा-9 एवं शरद प्रभेद अनुशंसित है। बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए। जुन-जुलाई में बोयी गई अरहर की फसल में कीट-व्याधि का निरीक्षण करते रहें। मूली एवं गाजर की अगेती बुआई करें। मूली के लिए पूसा चेतकी, पूसा देशी, पूसा हिमानी, जौनपुरी जापानी सफेद, पूसा रश्मि, जापानी सफेद, पंजाब सफेद, अर्का निशान्त आदि प्रभेद अनुशंसित है। गाजर के लिए पूसा केसर, पूसा मेघाली, पूसा यमदागिनी, अमेरिकन ब्युटी, कल्याणपुर येलो एवं नैन्टेस प्रभेद का बीज चार पांच किलो प्रति बुआई करें। भिंडी की फसल में पीला मोजैक वायरस रोग की निगरानी करें। यह रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें। रोग के विस्तार से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड एक मीली प्रति तीन लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
 

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