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Ram temple movement became mass movement

राम मंदिर के निर्माण का श्रेय विराट हिन्दू समाज को : अम्बरीष सिंह

हिन्दू समाज अपने को ठगा महसूस न करे इसकी सतत चिंता करनी होगी

राम मंदिर के लिए 76 युद्धों में हमारे लाखों पुरखों ने आत्माहुति दी

लखनऊ, 05 अगस्त (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय सह मंत्री अम्बरीष सिंह ने कहा कि रामजी के मन्दिर निर्माण की बाधा दूर करने का श्रेय तो किसी को दिया जा सकता है लेकिन इसके निर्माण का श्रेय है तो विराट हिन्दू समाज

को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्याग समर्पण, बलिदान और अखण्ड श्रद्धा से युक्त,जाति मत भाषा प्रान्त विचारधारा के आग्रहों से मुक्त हिन्दू समाज जो केवल रामजी के प्रति समर्पित था न कि किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति,उसका एजेंडा केवल राम मंदिर था। इसलिए वह समाज अपने को ठगा न महसूस करे इसकी भी चिंता हमें सतत करनी होगी।

विहिप पदाधिकारी ने कहा कि किसी ध्वंस ‘प्रासाद’ के पुनर्निर्माण में कंगूरे की ईंट रखकर उसकी पुनर्प्रतिष्ठा करने वाले को ही कर्ता मान लेने का भ्रम पाल लेना उनके प्रति अन्याय है जिनके त्याग बलिदान और साधना से ‘प्रासाद’ का पुनर्निर्माण आधारस्तम्भ से शिखर तक सम्भव हो पाया, संकल्प की सिद्धि हो पायी।

विश्व का सबसे बड़ा जनान्दोलन बना राम मंदिर आन्दोलन

राम मंदिर के लिए 76 युद्धों में लाखों पुरखों ने आत्माहुति दी है। इसके बाद 07 अक्टूबर 1984 को आरम्भ 77वां युद्ध जो सहस्त्राब्दी का विश्व का सबसे बड़ा अहिंसक जनान्दोलन बना। जन्मभूमि आन्दोलन में असंख्य रामभक्तों ने समय, श्रम,धन और प्राण तक की आहुति दी,। श्रीराम जानकी यात्रा निकाली गयी। लाखों गांवों में श्रीरामशिलापूजन किया गया। नौ नवम्बर 1989 को शिलान्यास हुआ। इसके बाद 4 अप्रैल 1991 को दिल्ली के वोट क्लब पर उमड़ा जनज्वार,पादुका पूजन और गीता जयंती के पावन पर्व पर 6 दिसम्बर 1992 को पराधीनता के प्रतीक ढांचे को हिन्दू समाज ने विध्वंस कर दिया।

हमने संकल्प लिया था रामलला का मन्दिर रामभक्तों के भावना और श्रद्धा का प्रतीक होगा केवल भव्य इमारत नहीं इसे हमें प्रत्येक क्षण स्मरण रखना होगा।

राम मंदिर आन्दोलन में पूज्य संतों की भी रही विशेष भूमिका

राम मंदिर आन्दोलन के योजनाकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व.मोरोपंत पिंगले रहे। संगठन की योजनानुसार शुरू हुए आन्दोलन में पूज्य संतों की भी विशेष भूमिका रही जिन्हों आन्दोलन में जान फूंकने का काम किया। वह चाहे दिगम्बर अखाड़ा परमहंस रामचन्द्र दास जी महाराज रहे हों या पूज्य महंथ अवैद्यनाथ, पूज्य रामानंदाचार्य शिवरामाचार्य,पूज्य शंकराचार्य विष्णुदेवानंद जी और वीतराग स्वामी बामदेव जी महाराज ने हिन्दू समाज को जाग्रत करने का काम किया। वहीं हिन्दू हृदय सम्राट अशोक सिंहल, दाऊदयाल खन्ना, आचार्य गिरिराज किशोर, ओंकार भावे और पूज्य ठाकुर गुरुजन सिंह जैसे आन्दोलन के आधारस्तम्भों को हिन्दू समाज सदैव स्मरण करेगा।
 

Ram temple movement became mass movement

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