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गुरु की कृपा से अवश्य मिलती है सफलताः स्वामी अखण्डानंद

हरिद्वार, 28 नवंबर । वेदान्त वेता टाट वाले बाबा के 32 वें वार्षिक वेदान्त सम्मेलन में आज स्वामी रविदेव महाराज ने टाट वाले बाबा को नमन करते हुए कहा कि मनुष्य निष्काम भक्ति करे। इस शरीर में आशक्ति ही सबसे बड़ा बंधन है। कामनायुक्त भक्ति नहीं करनी चाहिए, यह क्रमिक मुक्ति का साधन है। यदि आत्मा को परमात्मा से मिलन कराना है तो गुरु मंत्र का पाठ एवं निष्काम भक्ति व सत्संग करें।

स्वामी सर्वात्मानंद ने कहा कि यह जगत तो स्वपन मात्र है। तीनों काल में तो जगत बना ही नहीं है। स्वामी अखण्डानंद महाराज ने बताया कि चेतना क्या है, यह शब्दों का विषय नहीं है अपितु यह कल्पना का विषय है। स्वपन देखते हैं, रोशनी में कभी जागते हुए उस रोशनी को कलिपत करके देखें, यह अपने ढंग की अलग रोशनी है। आत्मा रस तक पहुंचना हमारा उद्देश्य है, तैयारी यदि पूरी नहीं है तो सफलता नहीं प्राप्त होगी। मन की पवित्रता एवं एकाग्रता बहुत आवश्यक है।

गुरु की देखरेख में यदि हम चलते हैं तो सफलता अवश्य मिलती हैै। निग्रह शक्ति माया शक्ति संसार की सच्चाई को ढक देना। सुष्पति परमात्मा में विलय, प्राकृतिक आंतरिक लय-ज्ञान संस्कार, मन बुद्धि व इन्द्रियों में जीव को जीवन को ज्ञान नहीं होता। परमात्मा ही गुरू है, काशी में गुरु नाम की परम्परा है। गुरु किसी भी विद्या का ज्ञाता है। वेदान्त सम्मेलन का संयोजन डॉ. सुनील बत्रा ने किया।

इस अवसर पर रचना मिश्रा, संजय बत्रा, विजय शर्मा, सुरेन्द्र बोहरा, दीपक भारती एड़, लव गौड़, मधु गौड़, प्रेम केशवानी, उदित गोयल, भावना गौड़, आनन्द सागर, आरती गर्ग, शारदा खिल्लन, ईश्वर तनेजा, अमृता माता, नवीन अग्रवाल, डॉ. अशोक पालीवाल, पल्लवी सूद, रैना नैय्यर आदि श्रद्धालुगण एवं भक्तजन उपस्थित रहे।
 

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