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श्रीगंगानगर, 18 मई (हि.स.)। एशिया की सबसे बड़ी नहर परियोजना इंदिरा गांधी नहर समेत इससे जुड़ी कैनालों में जिंदा बम मिल रहे हैं। मरुधरा की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंदिरा गांधी नहर से गुजरे 4 दिनों में 10 बम मिल चुके हैं। सेना ने अभी तक मिले 10 में से 2 बमों को ही डिफ्यूज किया है। नहर में लगातार बम मिलने की घटनाओं से इलाके में दहशत का माहौल है। इन घटनाओं ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

इंदिरा गांधी नहर और इससे जुड़ी कैनाल में गुजरे 4 दिनों में 10 बम मिल चुके हैं। एक के बाद एक बम मिलने से इलाके के लोगों में भय का माहौल बन गया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी बम अपनी निगरानी में ले लिए है। बम मिलने का मामला सेना से जुड़ा है, इसलिए पुलिस ने बमों की सूचना सेना को दे दी है। स्थानीय पुलिस के अधिकारी बम की बरामदगियों को सन 2001 में बिरधवाल स्थित सेना के आयुध डिपो में आग लगने की घटना से जोड़ रहे हैं। जब आग के बाद धमाकों के साथ बम आस-पास के इलाकों में जा गिरे थे।

सूरतगढ़ डीएसपी शिवरतन गोदारा ने बताया कि लगातार बम मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से सेना को इन बमों के निस्तारण के लिए पत्र लिखा गया है। बड़ा सवाल यह है कि इस बार की नहरबंदी के दौरान बम मिलने की इतनी घटनाएं एकाएक क्यों बढ़ी हैं जबकि वर्ष 2001 के बाद अनेक बार नहरबंदी हो चुकी है। सेना ने अभी तक मिले 10 में से 2 बमों को ही डिफ्यूज किया है। शेष 8 के लिए पुलिस सेना दस्ते के आने के इंतजार में है।
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