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कोरोना संक्रमण से देश में सबसे ज्यादा मृत्यु दर देश के 11 राज्यों में से छह हिमालयी राज्यों में है। इनमें उत्तराखंड की मृत्यु दर हिमालयी राज्यों में सबसे ज्यादा है। उसके बाद नागालैंड में कोरोना मृत्यु दर ज्यादा है।

उत्तराखंड में कोरोना मृत्यु दर दो प्रतिशत के आसपास

पांच जून तक सर्वाधिक मृत्यु दर वाले हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड के बाद नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और मणिपुर है। उत्तराखंड में कोरोना मृत्यु दर दो प्रतिशत के आसपास है। 

हिमालयी राज्यों में कोरोना मृत्यु दर का अत्यधिक होना बेहद चिंता का विषय

सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में कोरोना मृत्यु दर का अत्यधिक होना बेहद चिंता का विषय है। कोरोना की दूसरी लहर में हुई मानवीय हानि ने हिमालयी राज्यों में जन स्वास्थ्य बदहाली की कलई भी खोली है। उनके मुताबिक, जन स्वास्थ्य के मामले में सभी हिमालयी राज्यों में कमोवेश एक जैसी स्थिति है।

संसाधनों की समस्या सभी हिमालयी राज्यों में समान

डॉक्टरों व दक्ष कर्मचारियों की कमी, संसाधनों की समस्या सभी हिमालयी राज्यों में समान है। केंद्र और राज्य सरकारों को इस बारे गंभीरता से विचार करना होगा। क्योंकि यह चिंता केवल हिमालयी राज्य में वास करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर नहीं है, बल्कि सवाल करोड़ों की संख्या में हर साल वहां यात्रा और सैर करने वाले सैलानियों और श्रद्धालुओं की सेहत का भी है।

11 राज्यों में हिमालयी राज्य

राज्य   -  मृत्यु दर (प्रतिशत में)

पंजाब  -   2.6

उत्तराखंड -2.0

नागालैंड  -1.9

महाराष्ट्र -  1.7

दिल्ली -1.7

हिमाचल -1.7

मेघालय  -1.7

गोवा    -1.7

अंडमान निकोबार - 1.7

सिक्किम  -1.6

मणिपुर  -1.6

कोरोना के बाद बढ़ा रक्त विकारों का खतरा

कोरोना से जंग जीत चुके लोगों पर ब्लैक फंगस के संक्रमण का ही नहीं, बल्कि कई रक्त विकारों का भी खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी धमनियों में रक्त के थक्के जमने से हृदय, मस्तिष्क समेत शरीर के कई अंगों तक खून ठीक से नहीं पहुंच पाता। इससे ब्रेन स्ट्रोक, लकवा, हार्ट अटैक व पेट दर्द के मामले बढ़ रहे हैं।

लेते रहें खून पतला करने की दवाएं

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कोरोना के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त का प्रवाह सही रखने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह पर खून पतला करने की दवाएं लेते रहें। 

शरीर में पानी की मात्रा कम न होने दें

श्री महंत इंद्रेश अस्पताल पटेलनगर के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज अरोड़ा के अनुसार, दिमाग में थक्का जमने से ब्रेन स्ट्रोक और लकवा भी पड़ रहा है। इससे बचने के लिए शरीर का हाइड्रेशन सही रखें और खूब पानी पीयें। समय पर चेकअप कराते रहें। 

बढ़ सकती हैं पेट संबंधी दिक्कतें

आरोग्यधाम हेल्थ सिटी के वरिष्ठ गेस्ट्रो सर्जन डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि कोरोना वायरस गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक को भी संक्रमित कर सकता है। थक्कों की वजह से आंत में खून का प्रवाह बाधित होता है। इससे पेट दर्द व अन्य दिक्कतें हो सकती हैं। 

खान-पान का रखें खास ख्याल

मांसाहारी, गरिष्ठ और बासी भोजन ना लें। हल्का, शाकाहारी, पोषक, तरल खाद्य पदार्थ, ताजी हरी व रेशेदार सब्जियां, फल आदि अपने डाइट चार्ट में उचित मात्रा में शामिल करें। 

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