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प्रतापगढ़, 30 मई (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने रविवार को मोदी सरकार के सात वर्ष पूरे होने को हर मोर्चे पर विफल बताया और कहा कि  आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही आजादी के इतिहास में अब तक की सबसे कमजोर सरकार है।

 सातवीं वर्षगांठ पर नैतिक साहस कर एक स्वतंत्र पत्रकार वार्ता के जरिये देश को यह बतायें कि जब सात वर्ष पहले उन्होंने कांग्रेस की यूपीए से सत्ता का कार्यभाल संभाला था तब उस समय देश की जीडीपी की दर क्या थी और उससे कितना फायदा हो रहा था और अब जब वह स्वयं यह दावा तक कर रहे थे कि डालर तक को नीचे लाया जा सकता है तो जीडीपी की दर स्थिति आज इतनी दयनीय स्थिति में कैसे आ पहुंची है। 

 श्री तिवारी ने पीएम से यह भी सवाल किया है कि वह सातवीं वर्षगांठ पर मन की बात में आखिर इस सवाल पर क्यूं चुप रहे कि सरकार बनने के समय उनका देश में नौजवानों को बेरोजगारी के क्षेत्र में दो करोड़ नौकरी देने का वायदा कहा चला गया है। पीएम यह भी बतायें कि कांग्रेस के समय और आज देश में बेरोजगारी की दर में बढ़ोत्तरी का कितना बड़ा अंतर सामने दिख रहा है। प्रधानमंत्री से पत्रकारिता दिवस पर कम से कम राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े इन ज्वलंत सवालों का जबाब देने के लिए स्वतंत्र प्रेस सम्मेलन का सामना करने के लिए आत्मविश्वास के साथ सामने आने की भी चुनौती दी है। सात वर्ष के अपनी सरकार की असफलताओं पर असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए अपने कुछ चहेते मंत्रियों और नजदीकियों का सहारा न लेकर स्वयं सवालों का जबाब दे क्योंकि यह सवाल सिर्फ विपक्ष के ही नही बल्कि देश की आम जनता के द्वारा उठाये जा रहे सवाल है।

 सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्देश के बाद केन्द्र सरकार द्वारा अनाथ बच्चों के लिए मदद की घोषणा को सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार के द्वारा खुद की जबाबदेही से बचने के लिए मजबूरी भरा कदम ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनाथ बच्चों को लेकर केन्द्र व राज्य सरकारों पर चाबुक न चलाया होता तो अभी भी हर जिम्मेदारी से भागने वाली मोदी सरकार मासूम बच्चों की परवारिश को लेकर गैर जिम्मेदार लापरवाही में ही नजर आती।

 हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर केन्द्र सरकार से जोखिम उठाकर आम जनता की आवाज को उठाने वाले सभी मीडिया कर्मियों को कोरोना योद्धा घोषित कर उन्हें सभी जरूरी सुविधायें भी मुहैया कराये जाने की घोषणा की भी जोरदार मांग उठाई है। रामदेव पर तंज कसते हुए कहा है कि बाबा को चाहिए कि वह हरिद्वार में प्रवास कर पहले अपने बड़बोलेपन का भी योगा से इलाज की पद्धति की तलाश करें।

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