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इस साल 80 पत्रकारों की हुई हत्या

लॉस एंजेल्स| दुनियाभर में साल 2018 में 80 पत्रकार मारे गए| इसके अलावे 60 बंधक बनाए गए जबकि 348 पत्रकार और गैर पत्रकारों को राजनेताओं के अविवेकशील आदेशों और धार्मिक उन्माद एवं व्यवसाइयों के क्रूरतापूर्ण हिंसा का शिकार होना पड़ा है। इन पत्रकारों में जमाल खशोगी को नृशंस और क्रूरतम हिंसा के शिकार होने के लिए सूची में पहले स्थान पर रखा गया है। खशोगी को 'टाइम' साप्ताहिक ने भी साल 2018 में मारे गए 65 पत्रकारों की सूची में पहले स्थान पर रखा है। हिंसा के शिकार पांच भारतीय पत्रकारों में श्रीनगर के पत्रकार शुजात बुख़ारी, नवीन निश्चल (दैनिक भास्कर), संदीप शर्मा (न्यूज वर्ल्ड), चंदन तिवारी (आज), अच्युतानंद साहू (दूरदर्शन) को विशेष रूप से उनके कार्य की सराहना करते हुए याद किया गया है। 
'रिपोर्टेरस विदाउट बॉर्डर्ज़' की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में हिंसा के शिकार मृत पत्रकारों में अफगानिस्तान (15), सीरिया (11) और मेक्सिको में नौ पत्रकारों को अपनी ड्यूटी करते हुए जान से हाथ धोना पड़ा है। गत जून में अमेरिका के मैरीलैंड में 'कैपिटल गजेट' में एक साथ पांच पत्रकारों को गोलियों से भून दिया गया था। 
पत्रकारों के लिए एडवोकेसी ग्रुप 'रिपोर्टेरस विदाउट बॉर्डर्ज़' ने अपनी वेबसाइट में दावा किया है कि साल 2018 में सर्वाधिक पत्रकार हिंसा के शिकार हुए हैं, जो एक रिकार्ड है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ऐसा पहला देश है, जहां सब से ज़्यादा 60 पत्रकारों को सरकारी दमन के कारण जेल की सजा भुगतने को विवश होना पड़ा है। इनमें 46 ब्लोगर हैं, जबकि टर्की ऐसा दूसरा देश है जहां 33 पत्रकार बंदी हैं। पत्रकारों पर अमानवीय और दमनकारी कार्रवाई करने वाले देशों में ईरान और मिस्र को भी काली सूची में रखा गया है।

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