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एनआरसी के मामले को कांग्रेस ने ही उठाया था : तरुण गोगोई

 

गुवाहाटी, 09 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एक बार फिर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की है। गुरुवार को अपने सरकारी विधायक आवास में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एनआरसी के मामले को कांग्रेस ने ही उठाया था। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों की तलाश करने के लिए थाना कमेटी व अन्य एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गोगोई ने कहा कि एनआरसी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा के साथ मेरा मत विरोध है। उन्होंने कहा कि हालांकि एनआरसी का कोई भी विरोध नहीं कर रहा है। 
उन्होंने कहा कि कांग्रेसी सरकार के कार्यकाल के दौरान ही एनआरसी की मोडिलिटी का निर्माण किया गया था। वर्तमान मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्हें बताना चाहिए कि यह कैसे हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि एनआरसी की अंतिम मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं हुए हैं| इसमें से काफी संख्या में भारतीय नागरिक हैं। ऐसे भारतीय लोगों की सहायता के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। यह बेहद गंभीर बात है।
इस मौके पर उन्होंने नागरिकत्व संशोधन विधेयक-2016 का भी पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी नागरिकत्व संशोधन विधेयक को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने क्यों इसका समर्थन किया है, यह रहस्य का विषय है। उन्होंने असम सरकार से सवाल किया कि नागरिकत्व संशोधन विधेयक का सरकार क्यों नहीं विरोध कर रही है। साथ ही कहा कि अगर नागरिकत्व संशोधन विधेयक सदन में गृहित होता है तो एनआरसी पूरी तरह से अर्थहीन हो जाएगी। इसका कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
असम सरकार में शामिल व क्षेत्रीयतावाद की राजनीति की दुहाई देने वाली असम गण परिषद (अगप) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगप के नेता लंबे-चौड़े भाषण जरूर देते हैं, लेकिन अंदरखाने सरकार के साथ उनकी मिलीभगत है। 
उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी के काम को आगे बढ़ाने में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्री भूमिधर बर्मन, रकीबुल हुसैन और डॉ हिमंत विश्वशर्मा ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को असम के मसले में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि असम में आए पश्चिम बंगाल के मंत्री और विधायकों को सरकार के द्वारा रोके रखना भी ठीक नहीं है। इस तरह पूर्व मुख्यमंत्री गोगोई ने एक ही समय में ममता बनर्जी का विरोध करने के साथ ही उनका समर्थन भी कर दिया। 
हालांकि गोगोई की यह मजबूरी भी है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ममता बनर्जी के साथ गलबहियां करती नजर आ रही है। जिसके चलते वे न चाहते हुए भी ममता बनर्जी का कड़े शब्दों में विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेशियों को राज्य में बसाने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि वर्तमान सरकार बांग्लादेशियों की राजनीति करती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपानीत गठबंधन सरकार देश में हिंदू बांग्लादेशियों के लिए रेड कार्पेट बिछाकर उनका स्वागत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए अगप अपने सिद्धांतों से समझौता करते हुए 855 शहीदों के त्याग को तिलांजलि देती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा और अगप का संबंध अतीत से नजर आता है। यह दिखावे के लिए एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं। अंदरखाने दोनों एक ही हैं।