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नोटबंदी में खेला गया गेम: 54 करोड़ खाते में ट्रांसफर करने वाला डायमंड कारोबारी आदित्य लोढ़ा अरेस्

 

जोधपुर, 06 अगस्त (हिस)। नोटबंदी के दौरान अपने गाड़ी चालक के नाम पर फर्जी खाता खोल उसमें 49 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन करने और उस पर आयकर विभाग से नोटिस आने के बाद चर्चा में आए डायमंड कारोबारी आदित्य लोढ़ा को पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में पता चला कि लोढ़ा ने ड्राइवर के नाम पर खोले इस खाते में 54 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन किए थे। इस प्रकरण में लोढ़ा द्वारा फर्जी साइन करने की पुष्टि भी एफएसएल जांच में हुई है। उल्लेखनीय है कि लोढ़ा के यहां गत वर्ष आयकर विभाग ने भी कार्रवाई की थी जिसमें करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ था। 
बासनी थानाधिकारी मदन बेनीवाल ने बताया कि मूलतया चामू देचू निवासी नरपतलाल उर्फ नरेश जोशी पुत्र पारसमल जोशी की ओर से गत वर्ष 13 अप्रैल को सरदारपुरा थाने में मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया गया कि आयकर विभाग से उसके नाम एक नोटिस आया था जिसमें 9 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच परिवादी के नाम के खाते में 49 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन किए गए हैं। आयकर विभाग का नोटिस देखकर जोशी भी चौंक गया क्योंकि उसे ऐसे किसी खाते के बारे में पता नहीं था। बाद में जोशी ने आयकर विभाग के अधिकारियों को बताया कि पूर्व में वह सरदारपुरा निवासी आदित्य लोढ़ा पुत्र केसी लोढ़ा के यहां ड्राइवर कम ऑफिस बॉय के रूप में काम करता था। तब लोढ़ा ने नौकरी पर रखने के लिए उसके ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड व अन्य दस्तावेज लेकर उन पर साइन भी कराए थे। जोशी की रिपोर्ट के अनुसार वह कभी पंजाब नेशनल बैंक की सरदारपुरा शाखा में ही नहीं गया और न ही उसने खाता खुलवाया था। लोढ़ा ने ही उसके दस्तावेज का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा करके वो खाता खुलवाया होगा और उसी खाते से हवाला कारोबारियों के साथ लेन देन किया होगा।
पहले समझौता हुआ था: बासनी थानाधिकारी बेनीवाल ने बताया कि इस प्रकरण में पूर्व में आपसी समझौता होने की वजह से इसमें एफ आर लगा दी गई थी। मगर बाद में नरपतलाल ने एक परिवाद पेश किया था। इसमें उसने बताया कि आदित्य लोढ़ा और उसके बेटे मनन लोढ़ा ने उसे अगवा कर तीन दिन तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान मारपीट कर उससे जबरन खाली कागजों पर साइन कराए थे। इस परिवाद पर प्रकरण फिर खोला गया और इसकी जांच बासनी थानाधिकारी बेनीवाल को सौंपी गई। मामले की जांच में जुटे बेनीवाल ने नरपतलाल द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेज पर मिले हस्ताक्षर की एफएसएल जांच कराई। इसमें स्पष्ट हुआ कि वो साइन नरपत ने नहीं किए थे। 
खाली प्लॉट के पते पर बताया कार्यालय: थानाधिकारी बेनीवाल के अनुसार लोढ़ा ने श्री सांई ट्रेडिंग कंपनी का खाता खुलवाते समय जो पता दिया वह सांगरिया के वीरतेजा नगर का था लेकिन पुलिस उस पते पर पहुंची तब वहां खाली भूखंड ही मिला। भूखंड के मालिक तक को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। लोढ़ा ने फर्जी खाता खोलकर करोड़ों के ट्रांजेक्शन तो किए मगर उसके लिए न तो कोई रजिस्ट्रेशन कराया और न ही टिन नंबर इत्यादि ही लिए थे।
नरपतलाल जोशी वासु हत्याकांड में रहा शामिल: थानाधिकारी बेनिवाल ने बताया कि नरपतलाल जोशी वासुदेव हत्याकांड के प्रकरण में जेल में है। इस पर वासुदेव की रैकी किए जाने का आरोप लगा है। उसे यह भान था कि उसके खाते में 49 लाख डलवा गए है, मगर असल में लेन देन 54 करोड़ का हुआ। आदित्य लोढ़ा ने बड़ी चतुराई से सारी रकम ट्रांजेक्ट करवा दी और खाते में मात्र 4- 5 हजार ही छोड़े। 
केपी कंपनी के नाम से खाते में डलवा रूपए: यह इतनी बड़ी रकम उसने कुछ नकद उठा ली और काफी केपी नाम की एक कंपनी में ट्रांसफर करवा दिए।