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रोमाचंक और अनुपम छटा आंचल में समेटे हुए है हरी गुफा

 

जगदलपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। बस्तर प्रकृति की अनुपम छटा से अटी पड़ी है। यहां के झील, झरने और गुफाएं देश और विदेश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यह हरी गुफा कांगेर घाटी में स्थित कोटमसर गांव से करीब 7 किमी दूर घने जंगलों के बीच में स्थित पहाड़ी पर है। इस गुफा के राज अभी तक बाहर नहीं आ पाए हैं। 
इस हरी गुफा के पहले कक्ष में मौजूद लाइम स्टोन हरीतिमा लिए हुए है। गुफा में प्रवेश करने के बाद दाईं और बाईं तरफ भी अन्य कक्ष हैं। हरी गुफा की सबसे बड़ी खासियत इसका हरा होना तो है ही इसके अलावा ये बस्तर की एकमात्र ऐसी गुफा है जहां दोपहर बाद कुछ देर के लिए सूरज की रौशनी अंदर आती है। 
घने जंगलों के बीच मौजूद इस गुफा के प्रथम कक्ष में छतों से लटकते स्टेग्लेटाइट के नमीयुक्त पत्थरों पर सूरज का प्रकाश पड़ता है और नमीयुक्त चट्टानों पर शैवाल उग आते हैं। इन्हीं शैवालों की वजह से ये चट्टानें हरी दिखाई पड़ती हैं। हालांकि अभी इस गुफा पर रिसर्च नहीं हो पाया है लेकिन गुफा विज्ञानी ने पहली जांच में गुफा के हरे होने का कारण यही बताया है। 
पीजी कॉलेज के भू-गर्भ विज्ञान के प्रोफेसर अमितांशु शेखर झा ने बताया कि इस पूरे इलाके में करीब 13-14 गुफाएं हैं। इनकी जानकारी स्थानीय ग्रामीणों के अलावा किसी को नहीं है। इनमें से सिर्फ 5 गुफाओं में ही काम हो पाया है, हरी गुफा पर अभी शोध होना बचा है। उन्होंने बताया कि बारिश में गुफा के अंदर जाना खतरनाक होता है। 
कोटमसर और इसके आसपास रहने वाले लोग इस गुफा के अंदर मौजूद स्टेग्लेटाइट को देवता मानते हैं। यहां 30 फीट लंबाई वाली स्टेग्लटाइट को देवता मानकर वर्ष में एक बार पूजा की जाती है। वहीं गुफा को देवस्थली माना जाता है। इस गुफा को अभी आम पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है।

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