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नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। विश्व-भारती विश्वविद्यालय केवल ज्ञान देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह एक प्रयास है भारतीय संस्कृति के शीर्षस्थ लक्ष्य को प्राप्त करने का। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व-भारती के दीक्षांत समारोह में यह बात कही। विश्व-भारती की स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल शिक्षित करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया को भारत और भारतीयता की दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह संस्था ज्ञान का उन्मुक्त समंदर है, जिसकी नींव अनुभव आधारित शिक्षा के लिए रखी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व-भारती के दीक्षांत समारोह में अपनी बात रख रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान, विचार और स्किल पत्थर की तरह नहीं होते, बल्कि जीवंत होते हैं। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि भारत के ज्ञान और उसकी परंपरा को विश्व के कोने-कोने में पहुचाने में विश्व भारती की बहुत बड़ी भूमिका है। गौरतलब है कि विश्व भारती की स्थापना 1921 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय है। मई 1951 में संसद के एक अधिनियम के जरिये विश्व-भारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय और 'राष्ट्रीय महत्व का संस्थान' घोषित किया गया था।
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