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गंगा प्रदूषण रोकने में निगम की तत्परता को पर्यावरणविदों ने सराहा

 

कोलकाता, 21 अक्टूबर (हि.स.)। दुर्गा पूजा से पहले गणेश पूजा और विश्वकर्मा पूजा के समय गंगा में प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेषों को नहीं निकालने का आरोप कोलकाता नगर निगम पर लगा था। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस बारे में चिंता साझा की थी। इसके बाद दुर्गा पूजा से पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी को एक खुले मंच से फटकार लगाते हुए हर हाल में गंगा प्रदूषण नहीं होने के लिए व्यवस्थाएं करने का निर्देश दिया था। इसका असर इस बार दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान दिख रहा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करने वाले तमाम विशेषज्ञों ने विसर्जन के दौरान गंगा नदी से प्रतिमाओं के अवशेषों को निकालकर तत्काल उसका निष्पादन करने को लेकर नगर निगम की सराहना की है। 
पर्यावरणविद सुभाष दत्ता ने रविवार को इस बारे में कहा कि फिलहाल दुर्गा पूजा का पूरा विसर्जन तो संपन्न नहीं हुआ है लेकिन कोलकाता और हावड़ा में नगर निगम की ओर से जिस बड़े पैमाने पर विसर्जित प्रतिमाओं के अवशेषों को निकालने का काम चल रहा है जो निश्चित तौर पर सराहनीय है। अभी विसर्जन का तीन दिन बीता है और नगर निगम में प्रत्येक दिन विसर्जित अवशेषों को निकालने में तत्परता दिखाई है। हालांकि अभी भी सोमवार तक का समय इसके लिए बाकी है इसलिए सुभाष दत्ता ने कहा " नगर निगम हाफ इयरली परीक्षा पास कर चुका है फाइनल परीक्षा सोमवार के बाद होगी।"

उल्लेखनीय है कि राजधानी कोलकाता के 23 गंगा घाटों को मिलाकर छोटे-बड़े 70 तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ है, जहां से प्रतिदिन विसर्जन के बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने प्रतिमाओं के अवशेषों को तुरंत निकालकर कचरा निष्पादन गाड़ियों की मदद से धापा (जहां कोलकाता के सभी कचरे का होता है निष्पादन) ले जाकर निष्पादित किया है। 
इस बारे में पूछने पर नगर निगम के मेयर परिषद के सदस्य (कूड़ा) देवव्रत मजूमदार ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इस साल गंगा सफाई के लिए विशेष तौर पर ध्यान दिया गया है। इसके लिए बाजेकदमतला घाट, बाबूघाट, निमतला घाट, बागबाजार घाट और कुमारटूली घाट पर बड़े पैमाने पर नगर निगम के कर्मचारियों की तैनाती की गई है जो विसर्जन के ठीक दूसरे दिन प्रतिमाओं के सभी अवशेषों को तुरंत निकाल ले रहे हैं। उन्हें निकालने के साथ-साथ नगर निगम की कचरा निष्पादन गाड़ियों में डाल कर वहां से तुरंत हटा दिया जा रहा है ताकि दोबारा इनके नदी में गिरने की आशंका ना बचे। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक विसर्जन बाजेकदमतला घाट पर होता है। वहां नगर निगम की टीम ने तीन बड़े क्रेन को लगाया है जिसके जरिए प्रतिमाओं के काठ की संरचनाओं और अन्य हिस्सों को नदी से निकाल कर तुरंत निष्पादित किया जा रहा है। देवव्रत ने कहा कि सोमवार को विसर्जन पूरा होने के बाद मंगलवार को गंगा नदी में प्रतिमाओं का एक भी अवशेष नहीं रहेगा।
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