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पश्चिम बंगाल के स्कूलों में बढ़ी छात्राओं की संख्या

 

कोलकाता, 24 नवम्बर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल राज्य शिक्षा विभाग की ओर से दावा किया गया है कि राज्य के स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को इस बारे में विभाग की ओर से एक बयान जारी कर दावा किया गया है कि जहां दूसरे राज्यों में छात्र -छात्राओं की संख्या में जमीन आसमान का अंतर है वहीं पश्चिम बंगाल में यह संख्या लगभग बराबर है। विभाग की ओर से जारी बयान में इस बात का जिक्र किया गया है कि राज्य के निजी स्कूलों में पंजीकृत लड़कियों की संख्या लड़कों के बराबर है| यह अनुपात 50:50 है जो बेहद उत्साहजनक है। यह आंकड़ा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई जिसका शीर्षक था 'एक नजर में शैक्षिक सांख्यिकी 2018'|
इसमें नवीनतम डाटा उपलब्ध कराए गए हैं जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि शिक्षा वर्ष 2015-16 में कक्षा एक से 12 के बीच निजी स्कूलों में छात्र -छात्राओं की संख्या बराबर रही है जो पिछले कई सालों की तुलना में अधिक है। विभाग की ओर से दावा किया गया है कि इन परिणामों को प्राप्त करने में, कन्याश्री और सबुज साथी जैसी योजनाएं मददगार हैं| यह दोनों योजनाएं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार रही हैं।
कन्याश्री योजना कक्षा XII (पिछले वर्ष विस्तारित स्नातकोत्तर) तक स्कूल जाने के लिए लड़कियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से वित्तीय मुआवजे प्रदान करती है। इसी तरह से सबुज साथी योजना प्रत्येक सरकारी स्कूल में वर्ग IX से XII तक की छात्राओं को साइकिल वितरित किया जाता है। इन दोनों ही परियोजनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
कन्याश्री और सबुज साथी दोनों का लक्ष्य बच्चियों का शिक्षा के क्षेत्र में शक्तिकरण रहा है। शिक्षा लड़कियों को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक कर रही है। नतीजतन बाल विवाह में स्कूल ड्रॉपआउट में भी उल्लेखनीय कमी हुई है। इसके साथ ही स्कूलों में लड़कियों के नामांकन में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले ग्रामीण बंगाल में लोग बच्चियों को शिक्षा से दूर रखते थे लेकिन अब इसे मूल जरूरत समझ रहे हैं और बड़ी संख्या में बच्चियों का नामांकन स्कूलों में कराया जा रहा है। यह राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की पहल का ही नतीजा है। विभाग की ओर से बताया गया है कि इसे और अधिक बढ़ावा देने के लिए अन्य परियोजनाओं को भी लागू किया जाएगा।

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