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मजदूरों की पेंशन बढ़ाने शीघ्र होगी बोर्ड की बैठक, पांच हजार करने का विचार

 

नागदा, 04 जनवरी (हि.स.)। कल-कारखानों में कार्यरत देश के करोड़ों मजदूरों की पेंशन बढ़ाने के लिए कवायद शुरू हुई है। पेंशन सलाहकार बोर्ड की त्रिपीक्ष बैठक अब शीघ्र होने वाली है, जिसमें मजदूरों की पेंशन बढ़ाने का मसला शामिल किया जा रहा है। न्यूनतम पेंशन अब 5 हजार करने की मांग पर विचार किया जा रहा है। यह खुलासा नई दिल्ली से लौटकर शुक्रवार को नागदा पहुंचे भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश नेता एवं मप्र शासन में पूर्व कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त मप्र शहरी-ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुल्तान सिंह शेखावत ने किया।
उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी न्यूज एजेंसी के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया केंद्रीय श्रममंत्री भारत सरकार संतोष गंगवार से इस मसले पर उनकी लंबी चर्चा गुरुवार को हुई थी। श्रम मंत्री ने मांग पर विचार करने का भरोसा दिलाया है। शेखावत का कहना है कि कल-कारखानों में कार्यरत इपीएफ स्कीम में करोड़ों की संख्या में पेंशनर हैं। इस योजना को जब 16 नवम्बर 1995 में लागू किया गया था, तब तत्कालीन सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रति पांच वर्ष में योजना की समीक्षा के साथ पेंशन राशि पुन: निधारण भी किया जाएगा। 
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने लगभग 3 वर्ष पहले न्यूनतम पेंशन एक हजार की थी। इसके पहले कई पेंशनरों को मात्र 500 या 600 रुपये पेंशन मिल रही थी। शेखावत ने श्रममंत्री के समक्ष यह मामला उठाया कि स्कीम की रशि में पुन: निर्धारण करने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में अब पेंशनर को न्यूनतम 5 हजार रुपये माह किया जाए। शेखावात की माने तो केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में आश्वसत भी किया है। पेंशन बढ़ाने के लिए सलाहकार बोर्ड की बैठक अब शीघ्र होने जा रही है। जिसमें इस मामले को शामिल किया जा रहा है। शेखावत ने बताया पेंशन योजना 1995 के तहत कल कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन से प्रतिमाह 12 प्रतिशत दर से इपीएफ में कटौती की जाती है। जिसमें से 8.6 प्रतिशत राशि पेंशन खाते मेें जमा होती है। इसी राशि से सेवानिवृति के बाद श्रमिकों को पेंशन का भुगतान होता है। 
शेखावत का मानना है कि अभी तक जो पेंशन मिल रही है वह सरकार की सामाजिक सुरखा पेंशन से भी कम है। उन्होंने बताया पेंशन योजना में सरकार के पास करोड़ों का सरप्लस जमा है। जिसमें से भी राशि समायोजित कर पेंशन में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसी प्रकार से लंब समय से चल रहे ग्रैयूटी कानून में संसोधन कर प्रतिवर्ष 15 दिन के स्थान पर 26 दिन ग्रेज्यूटी का भुगतान मजदूरों का करने का मसला भी उठाया गया है। इस मांग की प्रति केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गेहलोत को भी सौंपी गई है।

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