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वैज्ञानिकों की टीम ने धान की फसल का किया निरीक्षण

 

यमुनानगर, 03 सितम्बर (हि.स.)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के वैज्ञानिकों की टीम ने धान की फसल में कीड़े व बीमारियों को जानने के लिए खंड रादौर के विभिन्न गांवों में जाकर खेत में खड़ी धान की फसल का निरीक्षण किया। 
कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र गोयल ने सोमवार को बताया कि धान की फसल में होने वाली बीमारियों एवं कीड़ों से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ पौध सरंक्षण वैज्ञानिक डॉ. रणबीर टाया, जिला विस्तार कीट वैज्ञानिक डॉ. बजरंग लाल शर्मा व जिला विस्तार शिक्षा की टीम ने (शल्य विज्ञान) और डॉ. संदीप रावल की संयुक्त टीम ने गांव दामला, धौड़ग, कांजनू, अलाहर, जयपुर, करतापुर, बकाना, चमरौडी, पालेवाला व बरहेडी आदि गांवों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने गांव कांजनू में एक एकड़ में जीवाणु पत्ता अंगमारी (झुलसा रोग) व गांव करतापुर में एक-दो एकड़ में इस बीमारी का प्रकोप पाया। टीम ने गहनता से जांच करने पर पाया कि अधिकतर खेतों में शीथ ब्लाइट रोग या हापर कीड़े का प्रकोप था। 
कृषि विज्ञान केन्द्र, दामला के संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र गोयल ने किसानों से अपील की कि किसान अपनी फसलों में अंधाधुंध दवाइयों का प्रयोग न करें। फसलों में दवाइयों का प्रयोग करने से पहले पौधे को कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों को दिखाकर ही प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि धान में कीड़ों व बीमारी से बचाव के लिए निसरते समय धान में यूरिया का प्रयोग न करें। 
मौके पर कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को धान की फसल में होने वाली इस बीमारी की रोकथाम के लिए शीथमार (3 प्रतिशत) 450 मिली लीटर दवाई को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ एक शुरुआती तथा दूसरा 15 दिन के बाद दो बार छिड़काव करने की सलाह दी। टीम ने किसानों को बताया कि हापर बीमारी की वजह से फसल पीली होकर सूख जाती है। यह बीमारी गोलाकार टुकड़ियों में शुरू होती है और धीरे-धीरे इसका प्रकोप बढ़ता जाता है। इस बीमारी से बचाव के लिए 330 मिलीलीटर बुप्रोफेजिन 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

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