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गेंहू का आटा बचायेगा मधुमेह और हृदयाघात से

 

लखनऊ, 14 सितंबर(हि.स.)। गेहूं की आटे की रोटी से मधुमेह(शुगर)को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे हृदयाघात होने की संभावना कम है। ऐसा चन्द्र शेखर आजाद कानपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने एक खोज की है। कानपुर के वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक ऐसी प्रजाति की खोज की है, जिसके सेवन से इन बिमारियों में लाभ पहुंचायेंगे। 
कानपुर नगर के चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग के वैज्ञानिकों ने राई से मिलकर बनी गेहूं की एक नई किस्म की खोज की है, जिसका नाम ट्रिटिकल रखा गया है। इस फिजिकल गेहूं में फाइबर ग्लाइसेमिक इंडेक्स और प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में है, जिसके कारण यह गेहूं सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। वर्तमान समय में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में इस प्रजाति के बीजों को विकसित किया जा रहा है। 
खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सीमा सोनकर इन बीजों से औषधीय उत्पाद का निर्माण का प्रयोग कर रही हैं। 
डॉ. सोनकर की मानें तो गेहूं की इस प्रजाति से अभी मेडिकेटेड डिंक पाउडर और नॉन मेडिकेटेड डिंक पाउडर बनाया है। “राई और गेहूं को मिलाकर विकसित की गई क्रास वेराइटी ट्रिटिकल है, राई और गेहूं दोनों के जीन को मिलाकर इस प्रजाति को विकसित किया गया है, इसलिए यह मानव निर्मित प्रजाति है। “यह गेहूं मधुमेह प्रभावित लोगों के लिए बहुत बेहतर है क्योंकि इस गेहूं में ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 से 55 नंबर होता है जिसके कारण इसके प्रयोग से ब्लड ग्लूकोज बनने की रफ्तार कम हो जाती है। “उन्होंने आगे कहा, “इस गेहूं से बने उत्पाद शरीर में धीमी गति से अवशोषित होते हैं और फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण तेजी से पच भी जाते हैं। इसका प्रयोग इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखेगा और ब्लड शुगर शरीर में बहुत धीमी गति से बढ़ेगी।'
इसमें फाइबर और कैल्शियम की मात्रा अधिक डॉ. सीमा सोनकर के इन दोनों शोध पत्रों को इसी माह जर्मनी के गटिंगेन विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया गया है। जहां आमतौर पर गेहूं की सामान्य प्रजाति में प्रति 100 ग्राम में 13.5 ग्राम फाइबर होता है, वही इस प्रजाति में 14 ग्राम फाइबर है और जहां सामान्य प्रजाति में कैल्शियम 34 मिलीग्राम और फोलेट 45 माइक्रोग्राम होता है, वहीं इस प्रजाति में कैल्शियम 37 मिलीग्राम और फोलेट 173 माइक्रोग्राम है। इसमें आयरन की मात्रा 2.57 मिलीग्राम और जिंक की मात्रा 3.45 मिलीग्राम है। ट्रिटिकल में 13 ग्राम प्रोटीन भी है।
डॉ. सोनकर के अनुसार, क्रिटिकल गेहूं स्वाद और सेहत दोनों रूपों में शरीर के लिए बहुत बेहतर है क्योंकि गेहूं किस प्रजाति में फाइबर अत्यधिक मात्रा में है और फाइबर पेट और आंतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। फाइबर कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखता है इसलिए हृदय संबंधी बीमारियों के लिए भी इस गेहूं का उपयोग लाभदायक सिद्ध होगा। 

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