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नई दिल्ली, 18 मई (हि.स.)। देश में कोरोना के संक्रमण की वजह से अर्थव्यवस्था के साथ ही रोजगार के क्षेत्र पर भी काफी बुरा असर पड़ा है। कोरोना के पहले और दूसरे चरण के दौरान उद्योग धंधों के ठप होने की वजह से बेरोजगारी दर भी काफी बढ़ी है। ऐसे बुरे वक्त में नौकरीपेशा और बेरोजगार हुए लोगों को एम्पलॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) से काफी आर्थिक मदद मिली है। अप्रैल 2020 से लेकर मई 2021 के पहले पखवाड़े तक करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने अपने प्रोविडेंट फंड अकाउंट से धन राशि की निकासी की है। इस अवधि में लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। 

देशभर में एम्पलॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन के करीब छह करोड़ सब्सक्राइबर हैं। ईपीएफओ की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से करीब साढ़े तीन करोड़ सब्सक्राइबर्स ने पैसों की निकासी की है। इसका मतलब ये भी है कि कुल सब्सक्राइबर्स में से आधे से ज्यादा लोगों को ईपीएफओ से आर्थिक मदद लेनी पड़ी है। 

ईपीएफओ के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान ईपीएफओ से की गई 1.25 करोड़ रुपये की निकासी में डेथ इंश्योरेंस, पीएफ, पेंशन और ट्रांसफर के तौर पर सेटल किए गए दावे भी शामिल हैं। इस दौरान लगभग 72 लाख ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स ने कोविड-19 नॉन रिफंडेबल एडवांस के रूप में करीब 18,500 करोड़ रुपये की राशि ली है। ये एडवांस नॉन रिफंडेबल कैटेगरी में आता है। इसलिए कर्मचारियों को ये पैसा दोबारा ईपीएफओ के पास जमा कराना नहीं होगा। 

उल्लेखनीय है कि कोरोना का संक्रमण शुरू होने के बाद केंद्र सरकार ने पिछले साल ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को कोविड-19 नॉन रिफंडेबल एडवांस लेने की सुविधा दी थी, ताकि इसकी मदद से ईपीएफ सब्सक्राइबर्स संकट की घड़ी में अपनी आर्थिक परेशानियों से निपट सकें। इस सुविधा के तहत ईपीएफओ सब्सक्राइबर अपने प्रोविडेंट फंड अकाउंट में जमा राशि के 75 फीसदी या 3 महीने की वेतन के बराबर की राशि मे से जो भी कम हो, उस राशि को कोविड-19 नॉन रिफंडेबल एडवांस के रूप में ले सकते थे। इस सुविधा का इस्तेमाल कर करीब 72 लाख कर्मचारियों ने अपने प्रोविडेंट फंड अकाउंट से कुल मिलाकर लगभग 18,500 करोड़ रुपये की निकासी की। 

ईपीएफओ के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान प्रोविडेंट फंड खाते से प्रति व्यक्ति औसत निकासी 25,000 रुपये की रही। इन आंकड़ों में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि कोविड-19 नॉन रिफंडेबल एडवांस लेने वाले कर्मचारियों में से 82 फीसदी लोग अनस्किल्ड और कम वेतन वाले कर्मचारी हैं। 
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