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अस्पतालों में दी जाने वाली दवाएं पहुंचती हैं नक्सलियों केे पास

 

 

जगदलपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। बस्तर में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने और अंचल में वर्षाकाल में होने वाली विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए राज्य का स्वास्थ्य विभाग लोगों के लिए आवश्यक दवाईयां भेजता है। वे दवाईयां सीधे नक्सलियों के पास पहुंच जाती हैं। 
नक्सलियों से मुठभेड़ के बाद और इनके द्वारा छोड़े गये सामानों में सुरक्षाबलों को शासकीय दवाईयों की बड़ी खेप मिलती है। इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि नक्सलियों को भी क्षेत्र में फैलने वाली बीमारियों से रोकथाम के लिए शासकीय दवाईयों पर ही निर्भर रहना होता है। इन्हीं दवाईयों को खाकर वे अपना स्वास्थ्य ठीक करते हुए जवानों से लोहा लेते हैं। 
उल्लेखनीय है कि बस्तर में गरीबों को उपचार और बीमारियों की रोकथाम के लिए शासन सभी गांवों में उप स्वास्थ्य केन्द्र से अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों व अस्पतालों के माध्यम से दवाईयां वितरित करती है। इसी का फायदा नक्सली उठाकर बंदूक की नोंक पर इन दवाईयों को प्राप्त कर लेते हैं। नतीजतन जिनको लाभ मिलना चाहिए, उन गरीब ग्रामीणों को ये दवाईयां नहीं मिल पाती और नक्सली इन दवाईयों से अपना फायदा कर लेते हैं। अभी हाल ही में नारायणपुर जिले के अंतर्गत नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में प्राप्त दवाईयों की जांच में यह पाया गया कि ये दवाईयां सामान्य बुखार सहित उल्टी, दस्त सहित गर्भनिरोध के लिए हैं। इन दवाईयों का नक्सलियों के पास मिलना यह दर्शाता है कि शासन की कल्याणकारी नीति का नक्सली अपने हक में बेजा उपयोग कर रहे हैं। स्मार्ट कार्ड होने के बाद भी ग्रामीणों को आवश्यक दवाईयों की पूर्ति नहीं हो पाती है। इस संबंध में पिछले दिनों दंतेवाड़ा जिले के अंतर्गत केन्द्र की एक स्वास्थ्य टीम ने दौरा कर यह पाया था कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य केन्द्रों से दवाईयां मिलने में कठिनाई होती है और अंचल में नकली डाक्टरों से ही ग्रामीणों को उपचार कराना पड़ता है।