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भागलपुर, 8 अप्रैल (हि.स.)। परंपरागत कृषि में घटते मुनाफे और बढ़ती परेशानी को देखकर अब किसान कृषि के वैकल्पिक उपाय तलाशने लगे हैं। किसानों का रुझान अब मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, आम के बगीचे और अन्य व्यवसायिक पौधों के प्रति बढ़ा है। ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह तालाब, मुर्गी फार्म और आम के बगीचे देखे जा सकते हैं। हालांकि उक्त सारी योजनाओं में सरकार की ओर से इसे बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है लेकिन बैंकों के रवैया और विभागीय उदासीनता के कारण अधिकतर किसान अपने बल पर इस व्यवसाय को कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही काम गोराडीह प्रखंड के बड़हरी के किसान रंजन कुमार भारती ने किया है। रंजन कुमार भारती पेशे से किसान हैं। पहले रंजन परंपरागत कृषि ही किया करते थे लेकिन युवा होने के कारण सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से इन्होंने मुर्गी पालन और मत्स्य पालन को अपने जीविका का आधार बनाया और आज खुद को आत्मनिर्भर बनाते हुए सरकार के आत्मनिर्भर भारत योजना को साकार करते दिखाई दे रहे हैं। रंजन ने 2018 में मुर्गी पालन का काम शुरू किया। लेकिन एक-दो साल बाद इन्होंने तालाब भी खुदवाया और आज मछली पालन के साथ-साथ मुर्गी पालन भी कर रहे हैं। किसान रंजन भारती बताते हैं कि 2018 में मैंने मुर्गी पालन का काम घर से ही शुरू किया। धीरे धीरे काम बढ़ता गया, साथ ही यूट्यूब और गांव के अन्य किसानों का रुझान मछली पालन की ओर बढ़ता देख मैंने भी अपने खुद के पैसे से 12 कट्ठे में एक तालाब खुदवाया। तालाब को खुदवाने में मुझे कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मछली पालन में पहले वर्ष मुझे मुनाफा नहीं हुआ लेकिन अब इतना मुनाफा हो जाता है कि मेरा घर आराम से चल जाता है। यदि मछली पालन में ठीक-ठाक पूंजी लगाया जाए तो आमदनी भी अच्छी होगी। उन्होंने बताया कि तालाब के चारों ओर मैंने आम और पपीते का पौधा लगाया है। इससे मुझे खाने के लिए फल मिल जाता है। साथ ही इसे बेचकर कुछ आर्थिक फायदा भी हो जाता है। उन्होंने बताया कि तालाब को खुदवाने में मुझे एक लाख बीस हजार रुपये खर्च हुए हैं। तालाब में पानी के लिए बोरिंग बिजली और लेबर का खर्च भी पड़ता है। फिलहाल मैंने पंगास मछली का बीज तालाब में डाला है। इसमें दो लाख की लागत आई है। जब मछली तैयार हो जाएगा तो यह पांच लाख रुपये में बिक जाएगा। उन्होंने मुर्गी पालन को लेकर कहा कि मैंने 5 कट्ठे में मुर्गी फार्म का काम किया है। यदि 1000 मुर्गी के चूजे के साथ इसकी शुरुआत की जाए तो बीस हजार रुपये प्रति माह की आमदनी हो सकती है। एक हजार चूजे में मुझे एक लाख रुपये का लागत लगा है। उन्होंने सरकार की योजना पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मत्स्य पालन के लिए सरकार की योजना सिर्फ कागजों तक सीमित है। मैं खुद मछली पालन के लिए बैंक गया। साथ ही तालाब खुदवाने को लेकर मिलने वाली सब्सिडी के लिए मैंने विभाग के कई चक्कर लगाए लेकिन सबों की उदासीनता को देखते हुए मैंने खुद से यह काम किया। उन्होंने युवा किसानों से अपील किया है कि रोजी रोटी के तलाश में यदि किसान मछली पालन और मुर्गी पालन को अपना लेते हैं तो यह जीविका का बहुत अच्छा साधन है। किसानों को इसे जरूर अपनाना चाहिए साथ ही उन्होंने सरकार से भी अपील किया है कि किसानों को तालाब खुदवाने में और मुर्गी पालन में मिलने वाली सब्सिडी का नियम सरल करना चाहिए। ताकि किसानों को उसका लाभ मिल सके और किसान आत्मनिर्भर हो सकें। किसान आत्मनिर्भर होगा तो क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी इससे किसान के साथ-साथ गांव भी खुशहाल होगा।
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