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देश के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के बेकाबू होते हालातों के मद्देनजर कुछ दवा कंपनियों ने आपात स्थिति में कोविड-19 के टीके का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। दवा कंपनियों ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना जरूरी है। प्रस्ताव पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स में चर्चा शुरू हो चुकी है। इस बीच, 48 दिन बाद पहली बार देश में ठीक होने वालों से ज्यादा संख्या नए मरीजों की रही है। टास्क फोर्स के एक सदस्य ने बताया, देश में आपात स्थिति में टीके के इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अब तक इसके दस्तावेज समिति के समक्ष पेश नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया, पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण के नतीजों का अध्ययन करने और उसकी समीक्षा के आधार पर टीके के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इसे लेकर पूरी सतर्कता बरतनी होगी क्योंकि देश में हर किसी को टीके का इंतजार है। अगर आपात स्थिति में इसे इस्तेमाल के लिए लाया जाता है तो बाजार में मांग तेजी से बढ़ेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अभी तक एस्ट्राजेनेका कंपनी के टीके के आपात स्थिति में प्रयोग की अनुमति मांगी गई है। यह टीका तीसरे परीक्षण के अंतिम दौर में है। परीक्षण पूरे होने के साथ साथ पर्याप्त फॉलोअप आंकड़ों के आधार पर आगे विचार किया जा सकता है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ आदर पूनावाला ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की है कि वह अगले माह टीका के इमरजेंसी इस्तेमाल को लेकर आवेदन देंगे दरअसल, भारत में अभी तक कोरोना के टीके के आपात इस्तेमाल को लेकर किसी तरह के दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जबकि अमेरिका में हाल में जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, वैज्ञानिकों सुबूतों के साथ-साथ सुरक्षा के सभी मानक पूरे होने के बाद ही टीके को आपातकालीन स्थिति में लोगों तक उपलब्ध कराने की अनुमति दी जा सकती है। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, सभी परीक्षण के बाद दो महीने तक फॉलोअप आंकड़े जुटाना जरूरी है। इन्हीं के आधार पर टीके की सुरक्षा का पता चल सकता है। इसमें लापरवाही हुई तो नई आपदा को जन्म दे सकती है। कोरोना वायरस के इलाज में रेमडेसिविर दवा का इस्तेमाल बंद किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोविड संक्रमित मरीजों में इस दवा के खास नतीजे नहीं मिले हैं। ऐसे में मरीज को इतनी महंगी दवा देने से कोई फायदा नहीं है। रेमडेसिविर दवा का इंजेक्शन करीब चार से पांच हजार रुपये की कीमत में आता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जिन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं, वहां उच्चस्तरीय विशेषज्ञ टीम भेजी जा सकती हैं। ऐसे राज्यों को तेजी व ज्यादा संख्या में जांच बढ़ाने को कहा गया है ताकि समय रहते सभी केस का पता लगाया जा सके और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की जा सके। इससे पहले, केंद्र ने हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और मणिपुर में उच्चस्तरीय टीमें भेजी थीं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बीएमसी ने मुंबई में 31 दिसंबर तक स्कूल बंद करने का फैसला किया है। वहीं, दिल्ली में बेकाबू होते हालात को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार दिल्ली और मुंबई के बीच विमान व ट्रेन सेवाओं को बंद करने पर विचार कर रही है। हालांकि इसे लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और रेल मंत्रालय से बात करनी होगी। मंत्रालय ही इस पर अंतिम फैसला करेेंगे। दिल्ली सरकार ने शुक्रवार से घनी आबादी वाले इलाकों और कन्टेंमेंट जोन में कोरोना मरीजों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे शुरू किया। दिल्ली के 4500 कन्टेंमेंट जोेन में डोर टू डोर सर्वे के लिए 9500 टीमें बनाई गई हैं। हर टीम रोज 50 घरों का सर्वे करेंगी और पांच दिन में यह काम पूरा होगा। मध्य प्रदेश में दोबारा लॉकडाउन नहीं लगेगा। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जिन इलाकों में पांच फीसदी से ज्यादा संक्रमण दर है, वहां रात में कर्फ्यू रहेगा गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने भी दोबारा पूर्ण लॉकडाउन से इनकार कर दिया। हालांकि अहमदाबाद में एहतियातन शुक्रवार रात से 57 घंटे कर्फ्यू लगाया जाएगा
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