अशोकनगर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के अशोकनगर में साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। बुधवार को आरोपितों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर पुलिस ने दो लग्जरी कारें, बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सैकड़ों इस्तेमाल किए गए और नए सिम कार्ड, बैंकिंग किट, एटीएम एवं डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज और नकदी सहित बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की।
पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक आशुतोष गुप्ता के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल सर्विलांस और मैदानी स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर आरोपितों तक पहुंच बनाई।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य कथित तौर पर अन्य लोगों के आधार कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों को दूसरे लोगों को उपलब्ध कराने या बेचने के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किए जाने की आशंका है।
जब्त सामग्री में एयरटेल और बीएसएनएल के सैकड़ों सिम कार्ड के अलावा एयरटेल पेमेंट्स बैंक, फिनो पेमेंट्स बैंक सहित विभिन्न बैंकों की वेलकम किट और एटीएम कार्ड शामिल हैं। पुलिस इन दस्तावेजों और उपकरणों की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित बैंक खातों का इस्तेमाल किन साइबर अपराधों में हुआ और इनके जरिए कितनी रकम का लेन-देन किया गया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान छोटू उर्फ चंद्रपाल पुत्र हरि सिंह यादव, निवासी पिपरौदा कला, थाना कैंट, जिला गुना और दीपक पुत्र रामदयाल ओझा, निवासी नानाखेड़ी, जिला गुना के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान करीब 30 लाख रुपये की कथित ठगी की साजिश का भी खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ग्राम रुसल्ली निवासी रंजीत यादव और अन्य लोगों के साथ मिलकर आगरा निवासी राजू उर्फ पवन से करीब 30 लाख रुपये ठगने की योजना बनाई थी। आरोपियों के कथित बयान के मुताबिक, योजना के तहत पुलिसकर्मी बनकर राजू उर्फ पवन को पकड़ा गया था और रुपयों के सेटलमेंट को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान नईसराय पुलिस ने दबिश दी, जिससे कथित योजना विफल हो गई।
पुलिस पूछताछ में घटनाक्रम में टाटा नेक्सॉन समेत तीन कारों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। कुछ लोगों के पास पुलिस विभाग में इस्तेमाल होने वाले मेन पैक सेट होने और वाहनों पर पुलिस का मोनोग्राम लगाए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश करने के साथ ही पूरे घटनाक्रम में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और दूसरे राज्यों में सामने आए साइबर अपराधों के साथ आरोपियों के संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से गिरोह के अन्य सदस्यों, संदिग्ध बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और साइबर ठगी की अन्य घटनाओं के संबंध में पूछताछ जारी है। पुलिस का प्रयास है कि जब्त सामग्री और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।