नई दिल्ली, 29 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय आज दिल्ली आबकारी घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 22 आरोपितों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करेगा। यह सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा करेंगी। इस मामले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न तो खुद और न ही किसी वकील के जरिये कोई दलील रखने की बात कही है। दोनों ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर भरोसा नहीं है। वह सत्याग्रह करेंगे।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 20 अप्रैल को दिल्ली आबकारी मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से हटने की केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया था। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मैं इस आरोप से प्रभावित हुए बिना ही अपना फैसला सुनाऊंगी, ठीक वैसे ही जैसा कि मैंने अपने 34 वर्षों के न्यायिक करियर में हमेशा किया है।
उन्होंने कहा था कि मैंने विवाद को सुलझाने का मार्ग चुना है। न्यायपालिका की शक्ति, आरोपों पर निर्णय लेने के उसके दृढ़ संकल्प में निहित है। मैंने ये आदेश बिना किसी चीज से प्रभावित हुए लिखा है। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मैं हिन्दी में आदेश जारी करूंगी क्योंकि दलीलें भी हिंदी में दी गई हैं।
केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता की बेंच पर सवाल उठाते हुए सुनवाई से हटने की मांग की थी। केजरीवाल ने कहा था कि जिस तरह से अब तक इस मामले में अदालती कार्यवाही हुई है, उससे उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही। उन्होंने कहा था कि 9 मार्च को जब उच्च न्यायालय में पहली सुनवाई हुई तो वहां 23 में से एक भी आरोपित मौजूद नहीं था। कोर्ट में सिर्फ सीबीआई मौजूद थी, लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता ने पहली ही सुनवाई में बिना दूसरे पक्ष की दलीलें सुने यह कह दिया कि 'प्रथम दृष्टया' सेशंस कोर्ट का आदेश गलत लगता है। बिना रिकॉर्ड मंगवाए और बिना दलीलें सुने कोर्ट इस नतीजे पर कैसे पहुंच गया।