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साइबर ठगी के 5.67 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश: राजस्थान पुलिस ने शुरू की ऑनलाइन व्यवस्था

जयपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा आर4सी मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के माध्यम से कार्रवाई कर रही है। इसके तहत अब तक 8016 आवेदनों पर कार्रवाई करते हुए 5.67 करोड़ रुपये की धनराशि लौटाने के लिए बैंकों को निर्देश दिए जा चुके हैं। इस व्यवस्था से साइबर ठगी के पीड़ितों को बैंक खातों में रोकी गई रकम वापस पाने में मदद मिलेगी।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि एमआरएम के जरिए धनवापसी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। इसका उद्देश्य पात्र पीड़ितों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी रकम वापस दिलाना है, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से बैंक और अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।

मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की ओर से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में रोकी गई राशि की वापसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

पुलिस के अनुसार यदि किसी एक बैंक खाते में रोकी गई राशि 50 हजार रुपये तक है, तो पहली श्रेणी में एफआईआर या न्यायालय के आदेश के बिना पुलिस रिपोर्ट और क्षतिपूर्ति वचनपत्र के आधार पर धनवापसी की प्रक्रिया हो सकती है। दूसरी श्रेणी में कुल रोकी गई राशि 50 हजार रुपये से अधिक होने, लेकिन किसी एक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होने पर पुलिस रिपोर्ट के आधार पर प्रक्रिया की जा सकती है। वहीं, किसी एक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि रोके जाने पर तीसरी श्रेणी के तहत एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है।

साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी होगी। शिकायत के बाद प्राप्त पावती संख्या के आधार पर एमआरएम पोर्टल mrm-ncrp.mha.gov.in पर ‘रिफंड अनुरोध’ विकल्प के जरिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन में शिकायत संख्या, ओटीपी सत्यापन और बैंक खाते का विवरण देना होगा।

इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी शिकायत, बैंक लेनदेन और रोकी गई राशि का सत्यापन करेंगे। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध खाताधारक से स्पष्टीकरण भी मांगा जाएगा। जांच में राशि पीड़ित की होने की पुष्टि होने और उसे आगे रोककर रखना आवश्यक नहीं होने पर पुलिस नियमानुसार धनवापसी की अनुशंसा करेगी। इसके बाद बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत रकम पीड़ित के खाते में स्थानांतरित करेगा।

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