- ज्ञान और नवाचार-आधारित क्षेत्रों के आर्थिक मूल्य को मापने के लिए बनाए ढांचे पर जनता से मांगी राय
नई दिल्ली, 16 मई (हि.स)। केंद्र सरकार ज्ञान और नवाचार-आधारित क्षेत्रों के आर्थिक मूल्य को मापने के लिए बनाए गए ढांचे पर जनता से राय मांगी है। सरकार ने भारत में ज्ञान और नवाचार-आधारित क्षेत्रों के आर्थिक मूल्य को मापने के उद्देश्य से प्रस्तावित एक रूपरेखा पर हितधारकों और आम जनता से प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किए हैं।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि इस कवायद का उद्देश्य "तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, जटिल कौशल की मांगों और प्रतिस्पर्धी माहौल में संगठनात्मक नवाचारों" के बीच अर्थव्यवस्था में ज्ञान की बढ़ती भूमिका का आकलन करना है।
मंत्रालय के अनुसार, यह पहल एक "अनोखी पहल" है, क्योंकि इस तरह के ढांचे के लिए कोई तुलनीय मिसाल उपलब्ध नहीं है; इसलिए, इसमें कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों और हितधारकों की भागीदारी की आवश्यकता है। मंत्रालय ने कहा, "इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय एक ऐसा ढांचा विकसित करने का काम कर रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और ज्ञान-आधारित उत्पादों के योगदान को मापा जा सके।"
एमओएसपीआई ने कहा कि इसके लिए सभी हितधारकों और आम जनता से परामर्श प्रक्रिया के तहत आधार पत्र पर टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। अपनी जानकारी 15 जून 2026 तक maneesh.jindal@mospi.gov.in और neeraj.kumar007[at]nic[dot]in ईमेल पतों पर इस मंत्रालय को भेजी जा सकती हैं। इससे इस रूपरेखा को शीघ्र अंतिम रूप देने में सहायता मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2025 में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के दौरान की गई सिफारिशों के बाद इस उद्देश्य के लिए एक तकनीकी सलाहकार समूह (टीएजी) का गठन किया गया। इस समूह की अध्यक्षता डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने की, जो उस समय क्षमता निर्माण आयोग के सदस्य थे।