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13 बकरियों से शुरू हुआ सफर, अब 1.80 लाख की सालाना आय का मजबूत सहारा बना बकरी पालन

कोरबा 17 अक्टूबर (हि. स.)। सीमित संसाधनों के बीच कृषि और मजदूरी पर निर्भर रहने वाले ग्राम माखुरपानी, पोस्ट अजगरबहार निवासी जयपाल सिंह के लिए बकरी पालन कभी सिर्फ अतिरिक्त आय का साधन था। पर्याप्त पूंजी, उन्नत पशुधन और वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में वे इसे बड़े स्तर पर शुरू करने का जोखिम नहीं उठा पा रहे थे। लेकिन शासकीय योजना से मिले सहयोग ने उनके इस छोटे प्रयास को व्यवस्थित आजीविका का रूप दे दिया।

जयपाल सिंह, पहले खेती और मजदूरी के साथ सीमित संख्या में बकरियां पालते थे। संसाधनों की कमी के कारण बकरी पालन से होने वाली आय भी सीमित थी। उन्हें हमेशा इस बात की चिंता रहती थी कि यदि पशुओं में बीमारी आ गई या उचित देखभाल नहीं हो पाई तो आर्थिक नुकसान हो सकता है।

इसी दौरान पशुधन विकास विभाग के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य बकरी उद्यमिता विकास योजना की जानकारी मिली। योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें 13 बकरी और 2 बकरा, कुल 15 नग पशुधन उपलब्ध कराया गया तथा 50 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला।

शासकीय सहायता मिलने के बाद जयपाल सिंह ने बकरी पालन को व्यवस्थित तरीके से करना शुरू किया। पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने बकरियों के समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, उचित पोषण, देखभाल तथा नस्ल सुधार जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया। इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और बकरी पालन के प्रति उनका भरोसा भी बढ़ा।

धीरे-धीरे बकरी पालन उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन गया। जो काम पहले सीमित स्तर पर किया जाता था, वही अब नियमित आय का माध्यम बन चुका है। योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.80 लाख रुपये हो गई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहूलियत मिली है।

जयपाल सिंह बताते हैं, “पशुधन विकास विभाग से मिली सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से मैं बकरी पालन को बेहतर तरीके से कर पा रहा हूं। पहले जहां इसे छोटे स्तर पर करता था, वहीं अब यही मेरे परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। इससे मेरी आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

जयपाल सिंह की यह कहानी बताती है कि शासकीय सहायता, सही तकनीकी मार्गदर्शन और मेहनत के साथ पारंपरिक पशुपालन को भी लाभकारी उद्यम में बदला जा सकता है। बकरी पालन ने उनके परिवार को आर्थिक मजबूती देने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार/हरीश तिवारी

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