नई दिल्ली, 21 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने चंडीगढ़ के सुखना झील के सूखने पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बिल्डर माफिया, अफसरों और राजनीतिक संरक्षण की मिलीभगत से झील को बर्बाद किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामले सीधे उच्चतम न्यायालय
क्यों लाए जा रहे हैं जबकि इन्हें उच्च न्यायालय में निपटाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि और कितना सुखाओगे सुखना झील को। उन्होंने झील को हो रहे नुकसान के लिए बिल्डर माफिया, अफसरों और राजनीतिक संरक्षण की मिलीभगत को जिम्मेदार बताया।
सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने सुखना झील से जुड़ा मामला उठाया, तो चीफ जस्टिस ने कहा कि पंजाब में बिल्डर माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और अफसरों की मिलीभगत से झील को पूरी तरह बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के परमेश्वर से कहा कि वे कोर्ट को बताएं कि कौन-कौन से स्थानीय मुद्दे हैं जिन्हें संबंधित उच्च न्यायालय खुद निपटा सकते हैं। इस दौरान कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि झीलों और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों।