बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 के चुनावी रण के लिए की बैठक, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का दिया निर्देश
-लखनऊ में बीएसपी की प्रदेशव्यापी बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा
-छह दिसंबर को अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर बड़े आयोजन का ऐलान
लखनऊ, 05 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछने से पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने संगठन को चुनावी मोर्चे पर सक्रिय करने की कवायद तेज कर दी है। गुरुवार को लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदेश व्यापी बैठक में उन्होंने प्रदेश के सभी 75 जिलों के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करते हुए पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक तैयारी मजबूत करने, मतदाताओं के बीच सक्रियता बढ़ाने और सर्वसमाज के लोगों को पार्टी से जोड़ने का निर्देश दिया। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जमीनी रणनीति, संभावित प्रत्याशियों के चयन और कमजोर वर्गों के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ाने पर विशेष जोर रहा।
बैठक में प्रदेश स्टेट यूनिट से लेकर मंडल और जिला स्तर तक के पदाधिकारी शामिल हुए। मायावती ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि संगठन की मजबूती केवल बैठकों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि गांव, गली और बूथ स्तर पर लगातार काम करने से सुनिश्चित होगी। उन्होंने विशेष रूप से गरीबों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों और अन्य कमजोर तबकों के मतों की एकजुटता बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। साथ ही अच्छे उम्मीदवारों की पहचान और उनके चयन की प्रक्रिया को समय रहते पूरा करने की जरूरत बताई।
बसपा प्रमुख ने छह दिसंबर को डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में होने वाले विशाल श्रद्धा-सुमन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का पार्टी का आग्रह स्वीकार कर लिया। यह आयोजन गोमती नदी के तट पर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में होगा। पार्टी ने इस अवसर पर जोरदार तैयारियां करने और इसे ऐतिहासिक बनाने का संकल्प जताया है।
बैठक में मायावती ने देश की मौजूदा चुनावी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिस तरह की विश्वसनीय व्यवस्था होनी चाहिए, उसका अभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और मतदाता सूची से जुड़े विवादों ने राजनीतिक दलों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी आपत्तियां दोहराईं और कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, महंगाई और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की राजनीति में गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और छोटे व्यापारियों के वास्तविक हितों की अपेक्षित अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक दावों से इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें कानून का शासन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो।