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BPSC से चयनित पूर्व नियोजित शिक्षकों की पुरानी सेवा जुड़ेगी या नहीं? सांसद जावेद ने उठाई मांग

किशनगंज, 12 अक्टूबर (हि.स.)। बिहार में BPSC के माध्यम से विद्यालय अध्यापक के पद पर चयनित पूर्व नियोजित शिक्षकों की पूर्व सेवा की गणना, सेवा निरंतरता, वित्तीय उन्नयन, प्रोन्नति और वरीयता का लाभ देने की मांग तेज हो गई है। किशनगंज के सांसद डॉ. मो. जावेद आजाद ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर नियमानुकूल एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है।

उन्होंने शिक्षा विभाग को इस संबंध में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने और दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2006 से 2022 के बीच पंचायत और प्रखंड स्तर पर नियोजित शिक्षकों ने सीमित मानदेय एवं संसाधनों के बावजूद लंबे समय तक सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने लगभग 15 से 20 वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में योगदान दिया है। बाद में राज्य सरकार द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से विद्यालय अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किए जाने पर इन शिक्षकों ने भी TRE-1.0, TRE-2.0 और TRE-3.0 प्रतियोगिता परीक्षाओं में हिस्सा लिया तथा सफल होकर विभिन्न श्रेणियों के विद्यालयों में नियुक्ति प्राप्त की।

सांसद ने कहा कि BPSC के माध्यम से चयन के बाद पूर्व नियोजित शिक्षकों को उनकी वर्षों की सेवा का समुचित लाभ नहीं मिल पाने से उनमें असंतोष और चिंता है। लंबे समय तक शिक्षक के रूप में कार्य करने के बावजूद नई नियुक्ति के बाद उन्हें नए शिक्षकों के समान मानने से उनके अनुभव और सेवाकाल का अपेक्षित लाभ प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पूर्व सेवा की यथासंभव गणना करते हुए संबंधित शिक्षकों को सेवा निरंतरता, वित्तीय उन्नयन, प्रोन्नति और वरीयता का उचित लाभ दिलाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। सांसद ने कहा कि इससे हजारों अनुभवी शिक्षकों को न्यायोचित लाभ मिलेगा और उनका मनोबल बढ़ेगा। पत्र की प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव तथा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को भी भेजी गई है।

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