नालंदा, बिहारशरीफ 10 सितंबर (हि.स.)। उप विकास आयुक्त सारा अशरफ की अध्यक्षता में 'मिशन शक्ति' तथा 'मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना' के सुचारू संचालन एवं प्रभावी अनुश्रवण हेतु गठित जिला संचालन समिति की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक गुरुवार को आयोजित की गई।
बैठक के प्रारंभ में नोडल पदाधिकारी (महिला एवं बाल विकास निगम) सह जिला प्रोग्राम पदाधिकारी अर्चना कुमारी द्वारा मिशन शक्ति अंतर्गत संचालित भारत सरकार की विभिन्न महिला कल्याणकारी योजनाओं एब्म बिहार सरकार की नारी शक्ति योजना की वर्तमान प्रगति प्रतिवेदन अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की गई।
उन्होंने केंद्र प्रायोजित 'मिशन शक्ति' के तहत संचालित वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, नारी अदालत, संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', शक्ति सदन एवं सखी निवास की स्थिति से अवगत कराया। इसके साथ ही 'मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना' अंतर्गत संचालित पालना घर (क्रेच), कौशल विकास योजना, सामाजिक पुनर्वास कोष, कामकाजी महिला छात्रावास, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न निवारण (पॉश एक्ट) तथा माहवारी स्वच्छता प्रबंधन की अद्यतन स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया।
प्रस्तुत प्रतिवेदन की गहन समीक्षा करते हुए उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित पदाधिकारियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में उपस्थित महिला थाना की थानाध्यक्ष को निर्देशित किया गया कि बाल विवाह अथवा छेड़खानी से संबंधित कोई भी मामला संज्ञान में आने पर पीड़िता की समुचित काउंसलिंग एवं मानसिक सहयोग हेतु 'वन स्टॉप सेंटर' भी रेफर करें। दूसरी ओर हेल्पलाइन पर पंजीकृत कुल 65 मामलों में से 62 मामलों के सफल निष्पादन पर संतोष व्यक्त किया गया। शेष बचे 3 लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश जिला परियोजना प्रबंधक को दिया गया। साथ हीं शक्ति सदन एवं कामकाजी महिला छात्रावास (सखी निवास) के सुचारू संचालन के लिए उपयुक्त भवन, स्थान के चयन हेतु अविलंब पुनः विज्ञापन प्रकाशित करने का आदेश दिया गया।
वहीं जिला समाहरणालय में संचालित पालना घर में प्रतिदिन औसतन 5 से 6 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। पुलिस लाइन में कार्यरत महिलाओं की सुविधा को देखते हुए पुलिस लाइन में भी पालना घर स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया हू।
हिंसा पीड़ित ऐसी महिलाएं जिनके पतियों द्वारा दूसरी शादी कर उन्हें छोड़ दिया गया है, उन्हें चिन्हित कर सूची तैयार करने का आदेश दिया गया। अत्यंत जरूरतमंद एवं असहाय महिलाओं को 'सामाजिक पुनर्वास कोष' के तहत ₹10,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु संचिका तुरंत अग्रसारित करने का निर्देश डीपीएम को दिया गया।
योजना के तहत चलाए जा रहे संवाद कार्यक्रमों की सराहना करते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी को जिले भर में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अन्य विशेष व नवाचारी गतिविधियां आयोजित करने को कहा गया। महिला उत्पीड़न रोकथाम कानून (पॉश एक्ट) का सख्ती से अनुपालन कराने पर जोर दिया गया। इसके तहत जिला एवं प्रखंड दोनों स्तरों पर दक्ष प्रशिक्षकों द्वारा विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
साथ ही उप विकास आयुक्त ने वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण करने की बात कही।बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त ने दोहराया कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और पुनर्वास जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सिविल सर्जन , जिला कल्याण पदाधिकारी , महिला थानाध्यक्ष , बिहार शरीफ , ममता - जीविका , जिला मिशन समन्वयक व अन्य उपस्थित थे।