बाढ़ पीडि़तों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए सडक़ों पर हर दो किलोमीटर पर पानी निकासी का हो प्रबंध भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद सरकार से मांग की है कि सरकार बरसाती नालों व नदियों के किनारों को पक्का करने के लिए ठोस पॉलिसी बनाए। हरियाणा के अस्तित्व में आने से लेकर आजतक नदियों के किनारों को पक्का करने के लिए कोई नीति नहीं बन पाई है। उन्होंने गन्ने की फसल के नुकसान के लिए अलग से एक लाख रुपये प्रति एकड़ देने की मांग की है।
शुक्रवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में बीकेयू प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि नालों व नदियों के पानी से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए उनकी सफाई गहराई और किनारे पक्के करने की ठोस नीति बनाई जानी चाहिए, जिसमें नदी में आने वाली जमीनों को अधिग्रहण करके स्थाई जगह तय करनी चाहिए।
चढूनी ने कहा कि प्रदेश में आपदा की सबसे अधिक मार राष्ट्रीय राजमार्गों व अन्य सडक़ों में पुलों का निर्माण न होने के कारण पड़ी है। पानी को आगे का रास्ता नहीं मिला और पानी एक स्थान पर जमा हो गया, जिससे ज्यादातर फसल तबाह हो गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों अन्य सडक़ों व रेलवे ट्रेक के निर्माण में हर दो किलोमीटर बाद पानी की निकासी के लिए पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। चढूनी ने कहा कि हांसी-बुटाना नहर को बनाया गया है, उस समय पहले से मौजूद घग्गर नदी को गांव सरोला में साइफन बनाकर हांसी-बुटाना नहर के नीचे कर दिया और उसके ऊपर कंक्रीट की पक्की दीवारों के सहारे साइफन बना दिया, जबकि इस साइफन के नीचे से चार नादियों मारकंडा, घग्गर,टांगरी व पटियाला वाली नदी का बरसाती पानी एक साथ गुजरता है। यह पानी बहुत ज्यादा स्तर पर होता है और साइफन तंग होने के कारण पानी की निकासी कम हो पाती है।
चढूनी ने कहा कि अभी तक सरकार ने गन्ने की फसल का मुआवजा भी घोषित नहीं किया है। इस आपदा में गन्ने की काफी फसल बर्बाद हुई है और गन्ने की फसल साल में एक बार तैयार होती है। इसलिए इसका अलग एक लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा घोषित किया जाना चाहिए।